
जन एक्सप्रेस/पुरोला :- प्रखंड छाड़ा के ग्रामीणों ने बुधवार को जल संस्थान द्वारा वर्षों पुराने पानी के बिलों की रिकवरी सर्टिफिकेट (आरसी) जारी किए जाने का विरोध करते हुए उपजिलाधिकारी मुकेश रमोला को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने जलापूर्ति बाधित रहने की अवधि के बिलों और जारी आरसी को निरस्त करने की मांग की।
सड़क निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त हुई थी पेयजल लाइन
ज्ञापन में ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2019 में पीएमजीएसवाई के तहत छाड़ा-कुरुड़ा मोटर मार्ग के निर्माण के दौरान गांव की पेयजल पाइपलाइन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसकी जानकारी तत्काल संबंधित विभाग को दी गई, लेकिन समय पर मरम्मत नहीं होने से गांवों की पेयजल व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई।
टैंकरों से पूरी करनी पड़ी पानी की जरूरत
ग्रामीणों का कहना है कि जलापूर्ति बंद रहने के कारण सामाजिक और पारिवारिक आयोजनों में उन्हें जल संस्थान से पानी के टैंकर मंगाने पड़े। प्रत्येक टैंकर के लिए लगभग 1,000 रुपये का भुगतान ग्रामीणों को स्वयं करना पड़ा।
भूख हड़ताल के बाद भी नहीं हुआ समाधान
ग्रामीणों ने बताया कि पेयजल व्यवस्था बहाल कराने की मांग को लेकर वर्ष 2021 में तहसील परिसर में भूख हड़ताल भी की गई थी। उस समय जल संस्थान ने लिखित रूप से जल्द जलापूर्ति बहाल करने का आश्वासन दिया था, लेकिन लंबे समय तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ। बाद में वर्ष 2023 से जल निगम के माध्यम से गांव में नियमित पेयजल उपलब्ध कराया गया।
बिना पानी मिले कैसे जारी हुए बिल?
ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि वर्ष 2019 से 2023 तक जब जल संस्थान की ओर से पेयजल आपूर्ति ही नहीं हुई, तो उस अवधि के पानी के बिल किस आधार पर जारी किए गए। उनका आरोप है कि विभाग ने पहले नियमित रूप से बिल भी उपलब्ध नहीं कराए और अब बिना पूर्व सूचना सीधे आरसी जारी कर दी, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
निष्पक्ष जांच और आरसी निरस्त करने की मांग
ग्रामीणों ने एसडीएम से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जलापूर्ति बाधित रहने की अवधि के पानी के बिल एवं जारी आरसी को निरस्त करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।
ज्ञापन पर शीशपाल, अतर सिंह, सुरेन्द्र, शैलेंद्र, अनीता, मीमा, कमला देवी, तारी देवी, राजकुमारी, लक्ष्मी, किन्दरी देवी, अनिल, जतनी लाल, प्यार दास, प्रवीन, दिनेश, जयरिया, कुंदन सहित कई ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं।






