राम मंदिर दान घोटाला योगी सरकार के विशेष जांच दल पर उठे सवाल
सरकार के भरोसे बैठे अधिकारी करेंगे निष्पक्ष जांच या सत्ता की लाइन पर लिखेंगे रिपोर्ट

जन एक्सप्रेस / लखनऊ : राम मंदिर दान में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल अब खुद सवालों के घेरे में आ गया है। जिस टीम से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की उम्मीद की जा रही थी, उसी टीम की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न उठने लगे हैं।
विशेष जांच दल में शामिल अधिकारियों की स्थिति और उनके सरकारी निर्भरता को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासतौर पर वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार को लेकर उठ रहे सवाल जांच की निष्पक्षता पर सीधे असर डाल रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, नील रतन कुमार 30 सितंबर 2024 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन उसके बाद से लगातार सेवा विस्तार पर कार्य कर रहे हैं। लगभग दो साल से सेवा विस्तार पर चल रहे इस अधिकारी की मौजूदा स्थिति पूरी तरह से सरकार की कृपा पर निर्भर बताई जा रही है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कोई ऐसा अधिकारी, जिसका भविष्य सरकार के फैसलों पर टिका हो, वह सरकार के खिलाफ या उसके विपरीत जाकर निष्पक्ष रिपोर्ट दे पाएगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की संवेदनशील जांच में ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है। उनका कहना है कि जब अधिकारी का सेवा विस्तार ही सरकार के हाथ में हो, तो उसकी निष्पक्षता स्वतः संदेह के घेरे में आ जाती है।
विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी विशेष जांच दल की संरचना पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह जांच निष्पक्ष कम और औपचारिक ज्यादा लग रही है। आरोप है कि रिपोर्ट पहले से तय दिशा में आगे बढ़ सकती है।
हालांकि सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि विशेष जांच दल को जल्द ही अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपनी है।
अब देखना यह होगा कि यह जांच सच सामने लाती है या फिर सत्ता के इशारों पर ही अपनी दिशा तय करती है। फिलहाल, राम मंदिर दान प्रकरण की जांच से ज्यादा विशेष जांच दल की विश्वसनीयता ही चर्चा का विषय बनी हुई है।




