केदारनाथ धाम के 101 तीर्थ पुरोहितों ने की नग्न पांव पैदल यात्रा

रुद्रप्रयाग । केदारघाटी की प्रसिद्ध डोलिया देवी (मां कात्यायिनी) की देवरा यात्रा के खाट गांव लौटने पर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा से स्वागत किया। मां की देवरा यात्रा 151 किमी की पैदल यात्रा करने के बाद गांव पहुंची। केदारनाथ धाम के 101 तीर्थ पुरोहितों ने 13 दिनों तक नग्न पांव पैदल यात्रा कर देवरा यात्रा को सकुशल संपंन करवाया।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार केदारघाटी में मां महिष मर्दिनी ने महिषासुर नामक दैत्य का वध किया था। महिष मर्दिनी की छोटी बहिन मां कात्यायिनी (डोलिया देवी हैं), जिनका मंदिर खाट-खड़िया गांव में है, जबकि मां महिषमर्दिनी का मंदिर मैखण्डा में है। दोनों बहिनों ने मिलकर केदारघाटी में राक्षसों का वध किया था।
केदारघाटी के कण-कण में देवी देवताओं का वास है। यही कारण है कि उत्तराखंड के केदारघाटी क्षेत्र को देवभूमि के रूप में पूजा जाता है। बीते 21 अगस्त को पहली बार मां डोलिया देवी की देवरा यात्रा केदारघाटी के भ्रमण के साथ ही केदारनाथ धाम गई थी, जहां डोली ने केदारपुरी का भ्रमण कर भक्तों को आशीष दिया। वहीं केदारघाटी के विभिन्न गांवों के भ्रमण के दौरान भक्तों ने मां डोलिया का पुष्प, अक्षत्रों से स्वागत किया। यात्रा के दौरान डोलिया देवी व महिषमर्दिनी दोनों बहनों का मिलाप भी हुआ।
13 दिनों की यात्रा करने के बाद मां अपने मूल स्थान खाट-खड़िया गांव पहुंची, जहां पहले से मौजूद सैकड़ों की संख्या में भक्तों ने देवरा यात्रा का पुष्प वर्षा से स्वागत किया। तीर्थ पुरोहित योगेन्द्र तिवारी ने बताया कि पहली बार डोलिया देवी की देवरा यात्रा निकाली गई थी। भगवान की मूर्तियों को डोली में स्थापित करके यात्रा निकाली गई। मां ने भक्तों के घरों पर जाकर उन्हें आशीर्वाद दिया है। उन्होंने बताया कि यह यात्रा काफी कठिन होती है, जिसमें नियमों का पालन किया जाता है। खाट-खड़िया निवासी केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहितों ने यह यात्रा क्षेत्र की खुशहाली व समृद्धि को लेकर निकाली थी।






