अमेठी

अमेठी में शिक्षा विभाग में जारी भ्रष्टाचार आखिर कब रुकेगा घोटालों का सिलसिला

जन एक्सप्रेस/अमेठ: जनपद का बेसिक शिक्षा वित्त लेखाधिकारी कार्यालय एक बार फिर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में घिर गया है। यह कोई पहली बार नहीं है जब इस कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं। कुछ समय पहले भी एक बड़ा घोटाला सामने आया था, लेकिन कड़े कदम उठाने के बजाय मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब फिर से करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आया है, जिससे सवाल उठता है!

क्या भ्रष्टाचारियों को सिस्टम का डर नहीं रहा?पहले भी हो चुका है घोटाला, पर कार्रवाई सवालों के घेरे में,करीब दो साल पहले, इसी वित्तीय विभाग में वेतन और एरियर भुगतान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पकड़ी गई थीं। कई शिक्षकों और कर्मचारियों के खातों में बिना किसी वैध कारण के लाखों रुपये ट्रांसफर कर दिए गए थे। उस समय कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया, लेकिन मुख्य आरोपियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। जांच कमेटी बनी, रिपोर्ट तैयार हुई, लेकिन नतीजा सिफर रहा।अब फिर से लगभग 9 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच में दो शिक्षकों के खातों में 2.5 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन पाए गए हैं, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया है। इस बार जांच की आंच पूर्व वित्त लेखाधिकारी तक पहुंची है, लेकिन क्या यह जांच निष्पक्ष होगी? या फिर पहले की तरह इस बार भी ‘छोटे कर्मचारियों’ को बलि का बकरा बना दिया जाएगा?

शिक्षक संघ और विभाग आमने-सामने शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष अब्दुल रशीद ने इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने महानिदेशक और अन्य अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा कि सिर्फ चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई कर जांच को खत्म न किया जाए, बल्कि असली दोषियों तक प्रशासन की पकड़ पहुंचे।दूसरी ओर, शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर पूर्व में हुई जांच सही होती, तो क्या आज फिर ऐसा घोटाला सामने आता?अब सभी की नजरें प्रशासन पर टिकी हैं।

क्या दोषी अधिकारियों और शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई होगी?क्या इस बार भी जांच सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह जाएगी?या फिर भ्रष्टाचार की यह कड़ी हमेशा के लिए टूटेगी?
जनता के सवाल, प्रशासन के जवाब बाकी!

इस घोटाले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा विभाग में वित्तीय अनुशासन की कमी है। सवाल यह है कि क्या अमेठी प्रशासन इस बार कोई मिसाल कायम करेगा, या फिर दोषियों को एक बार फिर बचने का मौका मिल जाएगा?

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