
सीपी बहुगुणा संवाददाता
जन एक्सप्रेस / उत्तरकाशी: उत्तरकाशी के एक ग्रामीण सरकारी स्कूल में हुए सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) की टीम ने 10 वर्षीय बालिका में जन्मजात हृदय रोग की पहचान की। समय पर जांच, रेफरल और उपचार के चलते कफनोल गांव की रहने वाली कु. प्रियांशी की सफल हृदय शल्य चिकित्सा हो सकी और अब वह पूरी तरह स्वस्थ होकर स्कूल जाने लगी है।
स्कूल में जांच के दौरान सामने आया जन्मजात हृदय रोग
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तरकाशी के तहत RBSK नौगांव टीम-बी ने राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय, कफनोल में स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस दौरान कक्षा 5 में पढ़ने वाली प्रियांशी में जन्मजात हृदय रोग (CHD) की पहचान हुई।
परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिजन बालिका का महंगा उपचार कराने में असमर्थ थे। ऐसे में RBSK टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आगे की चिकित्सा प्रक्रिया शुरू की।
नौगांव से देहरादून और फिर ग्राफिक एरा अस्पताल रेफर
बालिका को पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नौगांव से कोरोनेशन अस्पताल देहरादून और उसके बाद ग्राफिक एरा हॉस्पिटल रेफर किया गया।
RBSK प्रबंधक मनोज भट्ट ने दोनों अस्पतालों के चिकित्सकों से लगातार समन्वय बनाए रखा और बालिका के उपचार को लेकर फॉलोअप किया। इसके बाद 8 जून 2026 को ग्राफिक एरा हॉस्पिटल में प्रियांशी की सफल हृदय शल्य चिकित्सा की गई।
अब बालिका पूरी तरह स्वस्थ है और दोबारा स्कूल जाने लगी है।
सरकारी योजना बनी प्रियांशी के लिए संजीवनी
प्रियांशी का मामला बताता है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के बच्चों तक भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचा सकता है। RBSK की टीम विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचकर बच्चों में जन्मजात विकार, कुपोषण और विभिन्न बीमारियों की समय पर पहचान कर रही है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्याम विजय और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रोहित भंडारी ने RBSK टीम के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि गंभीर मामलों को उच्च चिकित्सा संस्थानों तक पहुंचाकर उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है।
परिजनों ने जताया आभार
प्रियांशी के परिजनों ने समय पर स्वास्थ्य जांच और उपचार की प्रक्रिया शुरू कराने के लिए डॉ. योगेश उनियाल और फार्मासिस्ट शुभम सेमवाल का आभार जताया। परिजनों ने कहा कि समय पर बीमारी की पहचान और सही मार्गदर्शन मिलने से उनकी बेटी को बेहतर उपचार मिल सका।






