रेप केस में उम्रकैद काट रहे सपा नेता गायत्री प्रसाद प्रजापति को VIP ट्रीटमेंट!
बलरामपुर अस्पताल में 6 महीने से 'बीमारी' की आड़ में आराम

जन एक्सप्रेस/लखनऊ।
उत्तर प्रदेश की जेलें क्या अब रसूखदार कैदियों के लिए ‘आरामगाह’ बन चुकी हैं? एक बार फिर यह सवाल गरम है। कारण – समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति, जिन्हें नाबालिग से बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में उम्रकैद की सजा मिली है, बीते छह महीनों से जेल नहीं, बल्कि बलरामपुर अस्पताल के प्राइवेट वार्ड में ‘विशेष देखभाल’ में रह रहे हैं।
2017 में गिरफ्तार, 2021 में उम्रकैद – पर जेल में कब हैं?
मार्च 2017 में गिरफ्तार और नवंबर 2021 में कोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा पाने के बावजूद प्रजापति लगातार ‘बीमारियों’ की आड़ में अस्पतालों में शिफ्ट होते रहे हैं। ये बीमारियाँ ऐसी हैं जिनका इलाज न तो जेल अस्पताल में संभव है और न ही इनकी रिपोर्टें सार्वजनिक होती हैं। सवाल है – क्या सचमुच बीमारी है या फिर रसूख का खेल?
KGMU में 1 साल और अब बलरामपुर में 6 महीने
साल 2022 में प्रजापति KGMU में लगभग पूरे एक साल भर्ती रहे। सूत्रों के अनुसार उस समय भी उन्हें वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया – अलग वार्ड, नियमित विज़िटर और तमाम सुविधाएं। अब दिसंबर 2024 से वह बलरामपुर अस्पताल की नई बिल्डिंग के प्राइवेट वार्ड नंबर 15 में ‘इलाज’ के नाम पर रुके हुए हैं।
यहां भी उनके कमरे में टीवी, पंखा, विशेष भोजन और मिलने-जुलने वालों की नियमित आवाजाही जारी है। अस्पताल स्टाफ और जेल सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत की भी चर्चाएं हैं।
जेलर से पूछा तो गोलमोल जवाब, अधीक्षक के नंबर बंद
इस मामले की पुष्टि के लिए जब लखनऊ जिला जेल के अधीक्षक के CUG नम्बर 9454418237 पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो नंबर बंद मिला। जिला जेल कार्यालय का नम्बर 9454418239 भी लगातार बंद मिला।
जेलर के CUG नम्बर 9454418238 पर बात होने पर उन्होंने सिर्फ इतना बताया कि “गायत्री प्रसाद प्रजापति का अस्पताल में इलाज चल रहा है,” लेकिन कब से भर्ती हैं – इस पर उन्होंने अनभिज्ञता जताई।
हालांकि, करीब 10 मिनट बाद जेलर ने जन एक्सप्रेस को पुनः कॉल कर जिला जेल अधीक्षक का दूसरा नम्बर उपलब्ध कराया और कहा कि किसी भी प्रकार का वर्जन देने का अधिकार केवल जेल अधीक्षक को ही है। साथ ही यह भी जोड़ा कि जेल परिसर में बीएसएनएल नेटवर्क काम नहीं करता, इसलिए दूसरे नम्बर पर कॉल करें।
जन एक्सप्रेस संवाददाता द्वारा उक्त वैकल्पिक नम्बर पर दो बार कॉल किया गया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया।
सबसे बड़ा सवाल – मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट कहां है?
अगर प्रजापति वास्तव में गंभीर रूप से बीमार हैं, तो फिर मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती? जेल मैनुअल के अनुसार किसी कैदी को जेल अस्पताल से बाहर शिफ्ट करने के लिए गंभीर मेडिकल आधार जरूरी होता है, जिसकी प्रमाणिकता और जांच भी आवश्यक होती है।
क्या आम कैदी को ऐसी सुविधा मिलती है?
यह मामला न सिर्फ जेल प्रशासन बल्कि चिकित्सा विभाग और राज्य सरकार की कार्यशैली पर भी गहरी चोट करता है। क्या एक सजायाफ्ता, गंभीर अपराधी को इतनी छूट देना न्याय के साथ खिलवाड़ नहीं? क्या आम कैदी को भी ऐसी सुविधाएं मिलती हैं?
जनता, न्यायपालिका और मीडिया को चाहिए हस्तक्षेप
यह मामला सिर्फ एक अस्पताल या एक कैदी का नहीं, बल्कि व्यवस्था की गिरती साख और कानून के दोहरे मापदंडों की कहानी है। अब समय आ गया है कि:






