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लखनऊ में कोडीन के बाद ‘नीले कैप्सूल’ का खतरा

जन एक्सप्रेस /लखनऊ :- करोड़ों रुपये के कोडीन सिरप रैकेट के बाद राजधानी लखनऊ में नशीली दवाओं के अवैध इस्तेमाल को लेकर एक और गंभीर मामला सामने आया है। इस बार जांच एजेंसियों के सामने दर्द और दूसरी चिकित्सीय समस्याओं में इस्तेमाल होने वाली दवाओं के दुरुपयोग का मामला आया है। ‘नीले कैप्सूल’ के नाम से चर्चा में आए इस मामले ने खास तौर पर युवाओं के बीच दवाओं के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

एफएसडीए के लखनऊ मंडल अधिकारी बृजेश कुमार यादव के मुताबिक, पिछले 15 दिनों में की गई कार्रवाई के दौरान करीब 5 लाख रुपये कीमत के नशीले कैप्सूल जब्त किए गए हैं। उनके अनुसार इन दवाओं की आपूर्ति फुटकर स्तर पर और लखनऊ के बाहर से किए जाने की जानकारी सामने आई है। विभाग अब केवल जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित सप्लाई नेटवर्क की भी जांच कर रहा है।

किन दवाओं की हुई बरामदगी?

छापेमारी के दौरान Spasmo Proxyvon, Pregabalin, Gabapentin और Tramadol जैसी दवाओं का नाम सामने आया है। इनमें कई दवाएं सामान्य रूप से दर्द, नसों से जुड़ी समस्याओं और कुछ अन्य चिकित्सीय स्थितियों के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं। समस्या तब पैदा होती है जब इनका इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बजाय नशे के लिए किया जाता है।

Pregabalin का इस्तेमाल तंत्रिका संबंधी दर्द और कुछ प्रकार के दौरे जैसी स्थितियों के उपचार में किया जाता है। हालांकि, भारत में इसके नियमन को हाल में और सख्त किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के CDSCO ने मई 2026 में Pregabalin और उसके formulations को Schedule H1 में शामिल करने की अधिसूचना जारी की।

दवाओं के गलत इस्तेमाल से क्या खतरा?

इन दवाओं का प्रभाव दवा, मात्रा और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। कुछ दवाओं से नींद, चक्कर, सुस्ती, भ्रम और प्रतिक्रिया की क्षमता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। Pregabalin के सामान्य दुष्प्रभावों में चक्कर और नींद आने जैसी समस्याएं दर्ज हैं। अन्य दवाओं के साथ इनके सेवन से जोखिम बढ़ सकता है।

विशेष चिंता तब होती है जब ऐसी दवाओं को शराब या अन्य केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाली दवाओं के साथ लिया जाए। ऐसी स्थिति में अत्यधिक सुस्ती और सांस से जुड़ी गंभीर समस्या का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इन दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह और निर्धारित खुराक के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

क्या Spasmo-Proxyvon बैन है?

Spasmo-Proxyvon को लेकर एक जरूरी कानूनी और नियामकीय तथ्य समझना जरूरी है। पुराने dextropropoxyphene वाले formulations पर भारत सरकार ने 23 मई 2013 को रोक लगाई थी। उपलब्ध सरकारी और चिकित्सा संदर्भों के मुताबिक dextropropoxyphene के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया गया था।

इसलिए बाजार में किसी उत्पाद के नाम मात्र से यह तय नहीं किया जा सकता कि वह प्रतिबंधित formulation है या कोई अलग formulation। किसी भी बरामद कैप्सूल की वास्तविक स्थिति उसके composition, manufacturer, batch और regulatory status की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

Pregabalin, Gabapentin और Tramadol पर क्या नियम हैं?

इन दवाओं को सामान्य ‘नशे की गोली’ समझना सही नहीं है। इनका चिकित्सकीय उपयोग है, लेकिन इनकी बिक्री और इस्तेमाल नियामकीय प्रावधानों के अधीन है। खास तौर पर Pregabalin को 13 मई 2026 की CDSCO अधिसूचना के जरिए Schedule H1 में शामिल किया गया है।

यानी बिना वैध चिकित्सकीय जरूरत और नियमों के इन दवाओं की बिक्री या इस्तेमाल गंभीर नियामकीय सवाल खड़े कर सकता है। CDSCO देश में दवाओं की गुणवत्ता और नियमन के लिए केंद्रीय प्राधिकरण है, जबकि राज्य ड्रग कंट्रोल एजेंसियां जमीनी स्तर पर प्रवर्तन की कार्रवाई करती हैं।

युवाओं के बीच क्यों बढ़ता है दुरुपयोग?

मेडिकल दवाओं के दुरुपयोग के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कम कीमत, आसानी से छिपाकर ले जाने की सुविधा, दोस्तों का प्रभाव और यह गलत धारणा कि ‘दवा है तो सुरक्षित होगी’ जैसे कारण जोखिम बढ़ा सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार नशे के लिए दवाओं का इस्तेमाल धीरे-धीरे निर्भरता और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं की ओर ले जा सकता है। इसलिए परिवारों को भी बच्चों और युवाओं में बिना चिकित्सकीय जरूरत दवाओं के इस्तेमाल पर नजर रखने की जरूरत है।

अब सप्लाई नेटवर्क की जांच पर नजर

लखनऊ में हुई ताजा कार्रवाई ने इस सवाल को फिर सामने ला दिया है कि चिकित्सा में इस्तेमाल होने वाली दवाएं आखिर अवैध तरीके से नशे के बाजार तक कैसे पहुंच रही हैं। एफएसडीए अधिकारी के मुताबिक विभाग सप्लाई चैन और नेटवर्क की जांच कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों या ठिकानों पर कार्रवाई हो सकती है।

फिलहाल सबसे जरूरी संदेश यही है कि किसी भी कैप्सूल या दवा को केवल उसके रंग या नाम के आधार पर पहचानने की कोशिश न करें। बिना डॉक्टर की सलाह दवा का सेवन न करें और संदिग्ध दवा मिलने पर उसे इस्तेमाल करने के बजाय संबंधित स्वास्थ्य या ड्रग नियामक विभाग को सूचना दें।

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