उत्तराखंडनई टिहरी

उत्तराखंड एकता मंच ने उठाई जनजातीय दर्जे की मांग

पर्वतीय क्षेत्रों को पांचवीं अनुसूची में शामिल करने की अपील

जन एक्सप्रेस/ नई टिहरी: उत्तराखंड एकता मंच ने राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों की मूल समस्याओं के समाधान के लिए गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र को संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत जनजातीय क्षेत्र घोषित करने की मांग उठाई है। मंच का कहना है कि इससे स्थानीय लोगों को पेसा (PESA) अधिनियम और वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 का लाभ मिल सकेगा तथा ग्राम सभाओं को अधिक अधिकार प्राप्त होंगे।

नई टिहरी प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में एकता मंच के प्रतिनिधि अनूप विष्ट और प्रवेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के मूल निवासियों को भी अन्य हिमालयी राज्यों की तरह संवैधानिक संरक्षण मिलना चाहिए। उनका दावा है कि वर्तमान में इन अधिकारों के अभाव के कारण पलायन, भूमि संबंधी समस्याएं, बेरोजगारी और स्थानीय संसाधनों पर अधिकार जैसे मुद्दे लगातार बढ़ रहे हैं।

मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि पर्वतीय क्षेत्रों को जनजातीय दर्जा मिलता है तो ग्राम सभाएं अधिक सशक्त होंगी, स्थानीय लोगों के अधिकार सुरक्षित होंगे और रोजगार, भूमि संरक्षण, सांस्कृतिक एवं भाषाई संरक्षण तथा ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि जनजातीय दर्जा मिलने से भूमि संरक्षण, सशक्त भू-कानून, वन अधिकार, जंगली जानवरों से सुरक्षा और रिवर्स पलायन जैसी संभावनाओं को बल मिलेगा। मंच का दावा है कि ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के मूल निवासी जनजातीय दर्जे के मानकों पर खरे उतरते हैं।

एकता मंच ने बताया कि अपनी मांगों के समर्थन में जनजागरण अभियान चलाया जा रहा है। कुमाऊं क्षेत्र के बाद अब पूरे गढ़वाल मंडल में लोगों से संपर्क कर इस विषय पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

पत्रकार वार्ता में अनिल उप्रेती, कुलदीप पंवार, जगजीत सिंह नेगी, उम्मेद सिंह नेगी सहित कई सदस्य उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button