Thursday, December 9, 2021
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पहली बार सौरमंडल से बाहर यान भेज,नासा रचेगा इतिहास

जन एक्सप्रेस/विशेष
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा पहली बार सौरमंडल से स्पेसक्राफ्ट भेज रहा है। ऐसा इतिहास में पहली बार होने जा रहा है कि कोई अंतरिक्ष एजेंसी सौरमंडल से बाहर अपने यान को भेज रहा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा एस्टेरॉयड्स के अध्ययन के लिए अगले हफ्ते एक बड़ा मिशन लॉन्च करने जा रहा है इस मिशन का नाम है लूसी एस्टेरॉयड स्पेसक्राफ्ट। लूसी अंतरिक्ष में जाकर प्राचीन एस्टेरॉयड्स का अध्ययन करेगा और सौरमंडल की उत्पत्ति के रहस्यों का पर्दाफाश करेगा। इस मिशन की लागत 7387 करोड़ रुपए हैं।
कब शुरू होगा लूसी स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में भेजने का कार्य
लूसी स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में भेजने का लॉन्च विंडो 16 अक्टूबर से शुरू हो रहा है।यानी तीन दिन बाद इस स्पेसक्राफ्ट को किसी भी समय नासा लॉन्च कर सकता है।यह मिशन 12 साल के लिए है।लूसी को सौर मंडल से बाहर जाने में 12 साल का समय लगेगा। इस दौरान यह आधा दर्जन से ज्यादा ट्रोजन एस्टेरॉयड्स के अगल-बगल से निकलेगा। ये एस्टेरॉयड बृहस्पति ग्रह के चारों तरफ चक्कर लगा रहे हैं।
इस मिशन में कई काम पहली बार होने वाले हैं जैसे लूसी पहली बार बृहस्पति ग्रह के एस्टेरॉयड बेल्ट से गुजरेगा।पहली बार कोई स्पेसक्राफ्ट सौर मंडल के बाहर भेजा जा रहा है। पहली बार सौर मंडल और ब्रह्मांड के प्राचीन इतिहास के अध्ययन के लिए किसी स्पेसक्राफ्ट को लॉन्च किया जा रहा है। नासा ने अपने बयान में कहा है कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि एक ही मिशन से कई काम किए जा रहे हैं।हम इतिहास खंगालने जा रहे हैं।
आखिर क्यों मिशन का नाम पड़ा लूसी
नासा का कहना है कि लूसी हमें अंतरिक्ष की प्राचीनता के बारे में बताएगी। ग्रहों की उत्पत्ति और एस्टेरॉयड्स की स्थितियों की जानकारी देगी।लुसी का नाम एक प्रसिद्ध प्रारंभिक ऑस्ट्रेलोपिथेसिन (ह्यूमनॉइड) कंकाल के नाम पर रखा गया है, जो लगभग 3.2 मिलियन वर्ष पुराना है, जिसकी खोज को लंबे समय से मानव विकास को समझने में कीस्टोन के रूप में माना जाता है।इस कंकाल से इंसानों की उत्पत्ति का पता चला था।इंसानों के निरंतर विकास के अध्ययन में एक नया मोड़, नई परिभाषा सामने आई थी। लूसी की खोज 1974 में हुई थी।
साउथवेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में लूसी मिशन के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर हैरोल्ड लेविसन ने कहा कि अगर वैज्ञानिक महत्व की बात करे तो अंतरिक्ष में मौजूद एस्टेरॉयड्स किसी हीरे से कम नहीं है। इनकी स्टडी करके हम बड़े ग्रहों की सरंचना का पता कर सकते हैं।हम यह पता कर सकते हैं कि हमारा सौर मंडल कैसे बना।इसे बनाने में किस-किस चीज की जरूरत पड़ी या कौन सी चीज लगी।
8 एस्ट्रोराॅयड्स का अध्ययन करेगा लूसी
लूसी स्पेसक्राफ्ट अपनी 12 साल की यात्रा के दौरान करीब 8 एस्टेरॉयड्स का अध्ययन करेगा। इस दौरान यह धरती के नजदीक तीन बार आएगा। जिसमें से दो बार सौर मंडल के अंदर से और तीसरी बार सौर मंडल के बाहर से। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए यह एक बड़ा कदम है। हम मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच मौजूद एस्टेरॉयड की दुनिया को समझना चाहते हैं।जिन 8 एस्टेरॉयड्स की स्टडी लूसी करेगा, उसमें सात ट्रोजन एस्टेरॉयड्स हैं।चार ट्रोजन एस्टेरॉयड्स जोड़े में है।यानी लूसी एक बार में दो एस्टेरॉयड का अध्ययन करेगा। साथ ही दो एस्टेरॉयड्स की तस्वीरें भेजेगा। लूसी स्पेसक्राफ्ट कई प्रकार के एस्टेरॉयड्स की अध्ययन के अलावा कई नए रहस्य का खुलासा भी करेगा। यह भी पता करेगा कि क्या किसी एस्टेरॉयड पर जीवन संभव है। या फिर कार्बनिक पदार्थ भी हो सकते हैं। क्या किसी एस्टेरॉयड पर सूक्ष्म जीवन है  या फिर भविष्य में संभव हैं।
किन एस्ट्रोराॅयड्स का अध्ययन करेगा लूसी
 लूसी स्पेसक्राफ्ट सौर मंडल से बाहर जाने से पहले जिन एस्टेरॉयड्स की अध्ययन करने वाला है वो हैं- 52246 डोनाल्डजॉन्सन, 3547 यूरीबेट्स और उसका उपग्रह क्वेटा, 15094 पॉलीमेले, 11351 लियुकस, 21900 ओरस और जोड़े 617 पेट्रोक्लस/मेनोइटियस।
लूसी स्पेसक्राफ्ट पर कलर विजिबल कैमरा, लॉन्ग रेंज रीकॉनसेंस इमेजर, थर्मल एमिशन स्पेक्ट्रोमीटर, टर्मिनल ट्रैकिंग कैमरा, हाई-गेन एंटीना लगे हैं, जो एस्टेरॉयड्स के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करेंगे। इस स्पेसक्राफ्ट को लॉकहीड मार्टिन कंपनी ने बनाया है. यह 43 फीट लंबा है। इसके सोलर पैनल 20 फीट व्यास के हैं।इसे एटलस-वी 401 रॉकेट से केप केनवरल लॉन्च स्टेशन से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
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