
जन एक्सप्रेस/देहरादून/धारचूला : हिंदू धर्म के पवित्र स्थल माने जाने वाले कैलास पर्वत से जुड़ी एक चिंताजनक जानकारी सामने आई है। कैलास मानसरोवर यात्रा से लौटे पहले भारतीय दल ने बताया है कि इस बार पर्वत के दक्षिणी हिस्से में बर्फ पूरी तरह गायब थी। विशेषज्ञों ने इसे जलवायु परिवर्तन का गंभीर संकेत माना है।
पांच साल बाद यात्रा शुरू, बदला नजर आया कैलास
पांच वर्षों के अंतराल के बाद पिथौरागढ़ से शुरू हुई कैलास मानसरोवर यात्रा का पहला दल शुक्रवार को भारत लौट आया। 45 सदस्यों के इस दल ने बताया कि यात्रा के दौरान कैलास पर्वत का दक्षिणी चेहरा पहली बार बर्फ रहित नजर आया। यात्रा दल के प्रभारी व आईटीबीपी के एडीजी संजय गुंज्याल ने बताया कि उन्होंने 2016 में भी यात्रा की थी, तब दक्षिण दिशा में बर्फ की मोटी परत मौजूद थी। लेकिन इस बार बदलाव साफ तौर पर देखा गया।
ओम पर्वत भी 2024 में हुआ था बर्फ विहीन
यह पहली बार नहीं है जब क्षेत्र के पर्वतों से बर्फ गायब हुई हो। अगस्त 2024 में ओम पर्वत भी बर्फ पिघलने के चलते काले रंग का नजर आया था। हालांकि कुछ दिनों बाद वहां बर्फबारी हुई, लेकिन यह घटना भी जलवायु परिवर्तन के संकेत देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पहले 2014 और 2018 में भी ओम पर्वत पर बर्फ की परत सामान्य से कम देखी गई थी।
वैज्ञानिकों की चेतावनी: 18,000 फीट से ऊपर बर्फ का गायब होना चिंताजनक
विशेषज्ञों के अनुसार, कैलास पर्वत की ऊंचाई 21,778 फीट है, और आमतौर पर 18,000 फीट से ऊपर बर्फ स्थायी रूप से जमी रहती है। दक्षिणी हिस्से से बर्फ का पूरी तरह गायब होना, एक गंभीर पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत हो सकता है।
विज्ञानियों और पर्यावरणविदों ने सरकार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हिमालयी क्षेत्रों की स्थिति पर गहन अध्ययन और निगरानी की मांग की है।





