उत्तराखंड

पर्यावरणविद सोनम वांचूक की रिहाई की मांग को लेकर कोटद्वार में जागरूकता अभियान

उत्तराखंड में अंधाधुंध पेड़ कटान पर जताई चिंता, बुद्धिजीवियों ने पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

जन एक्सप्रेस /कोटद्वार।लेह के जाने-माने पर्यावरणविद और समाजसेवी सोनम वांचूक की गिरफ्तारी को लेकर देशभर में विरोध तेज होता जा रहा है। सोनम वांचूक को जेल में हुए लगभग 90 दिन पूरे हो चुके हैं, जिसके बाद पर्यावरण प्रेमियों, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों द्वारा उनकी तत्काल रिहाई की मांग की जा रही है।इसी क्रम में कोटद्वार के तिलू रौतेली चौक पर शुक्रवार को एक जन-जागरूकता अभियान आयोजित किया गया। इस अभियान का नेतृत्व समाजसेवी एवं पर्यावरण कार्यकर्ता मुकेश सेमवाल ने किया। कार्यक्रम में कोटद्वार की ग्रीन आर्मी के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए।
देश और सेना के लिए दिया अहम योगदान : मुकेश सेमवाल
इस मौके पर समाजसेवी मुकेश सेमवाल ने कहा कि सोनम वांचूक ने देश और भारतीय सेना के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्हें रेमन मैगसेसे अवार्ड सहित 15 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। ऐसे व्यक्ति को इस तरह गिरफ्तार किया जाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है।
पेड़ कटान बना उत्तराखंड के भविष्य के लिए खतरा : मुजीब नैथानी
समाजसेवी मुजीब नैथानी ने उत्तराखंड में तेजी से हो रहे पर्यावरण ह्रास पर चिंता जताते हुए कहा कि उत्तराखंड अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। लेकिन पौड़ी से लेकर गंगोत्री तक विकास के नाम पर हो रही अंधाधुंध पेड़ कटाई भविष्य में राज्य के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
पर्यावरण असंतुलन से बढ़ेंगी प्राकृतिक आपदाएं : सुधांशु थपलियाल
कार्यक्रम में मौजूद पत्रकार सुधांशु थपलियाल ने कहा कि उत्तराखंड एक संवेदनशील हिमालयी राज्य है। यहां सड़कों के चौड़ीकरण और अन्य परियोजनाओं के नाम पर हजारों पेड़ों की कटाई की जा रही है, जिससे पर्यावरण और जलवायु पर गहरा असर पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो भूस्खलन, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाएं आम हो जाएंगी।उन्होंने यह भी कहा कि दिसंबर समाप्त होने को है, लेकिन इस वर्ष पहाड़ों में पर्याप्त बर्फबारी नहीं हुई, जो स्पष्ट रूप से जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत है।
समय रहते नहीं चेते तो होगा भारी नुकसानअभियान के दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार और समाज समय रहते पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर नहीं हुए, तो आने वाला समय उत्तराखंड के लोगों के लिए अत्यंत नुकसानदायक साबित हो सकता है।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने सोनम वांचूक की रिहाई, पेड़ों की कटाई पर रोक और सतत विकास नीति अपनाने की मांग की।

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