उत्तर प्रदेशलखनऊ

न्याय नहीं मिला तो टूट जाएगी एक और ज़िंदगी

सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह, लगाए सत्ता, पुलिस और परिवार पर गंभीर आरोप

जन एक्सप्रेस/नई दिल्ली/लखनऊ।जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंचकर अपने वैवाहिक जीवन का दर्द देश के सामने रख दिया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने घरेलू हिंसा, मानसिक उत्पीड़न, पुलिस तंत्र के दुरुपयोग और झूठे मुकदमों जैसे गंभीर आरोप लगाए, जिससे सियासी गलियारों में हलचल मच गई है।भानवी सिंह ने कहा कि एक पत्नी के रहते हुए घर में दूसरी महिला को रखा गया, और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्हें प्रताड़ना, इलाज से वंचित किए जाने और मानसिक रूप से तोड़ने की साजिशों का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि राजा भैया के राजनीतिक प्रभाव के कारण उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली की पुलिस उनके खिलाफ खड़ी कर दी गई।
भावुक होते हुए भानवी सिंह ने कहा,“हम अपनी हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। हमें कोई शौक नहीं है कि घर छोड़कर भटकें। अगर न्याय नहीं मिला, तो एक और ज़िंदगी टूट जाएगी।”उन्होंने भारतीय समाज की उस व्यवस्था पर भी सवाल उठाए, जहां कम उम्र में शादी कर दी जाती है, लड़की पर्दा, परंपरा और परिवार में खुद को पूरी तरह समर्पित कर देती है, दो बेटों को जन्म देती है और घर को मंदिर समझकर संभालती है।
भानवी सिंह ने कहा कि जब ऐसी महिला घर में दूसरी महिलाओं के आने का विरोध करती है, तो उसके हिस्से में हिंसा और उत्पीड़न ही आता है।भानवी सिंह ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि पारिवारिक संपत्तियों को ड्राइवरों, नौकरों और अज्ञात लोगों के नाम किया जा रहा है, ताकि उन्हें और उनके बच्चों को आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर किया जा सके। उनका कहना है कि पुलिसिया दबाव बनाकर उन्हें हार मानने के लिए मजबूर किया जा रहा है।गौरतलब है कि इससे पहले राजा भैया की बेटियों ने भी सोशल मीडिया के ज़रिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश सरकार पर न्याय न मिलने का आरोप लगाया था। उन्होंने यहां तक कहा था कि “न्याय दो या मरवा दो।”भानवी सिंह ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि अपने बच्चों और उस घर के सम्मान की लड़ाई है, जिसे उन्होंने वर्षों तक संजोया।अब पूरे देश की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां से उन्हें इंसाफ की आखिरी उम्मीद है।

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