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गाड़ी छोड़ी, सात किलोमीटर पैदल भागे… उत्तरकाशी आपदा में दो छात्रों की साहसिक जंग

हर्षिल में बादल फटने के बाद फंसे थे डीआईटी विश्वविद्यालय के छात्र, सूझबूझ से बचाई जान, सेना ने किया रेस्क्यू

जन एक्सप्रेस देहरादून/उत्तरकाशी: उत्तरकाशी में हालिया प्राकृतिक आपदा के बीच डीआईटी विश्वविद्यालय देहरादून के दो छात्रों ने असाधारण साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए अपनी जान बचाई। आपदा प्रभावित हर्षिल क्षेत्र में फंसे छात्रों ने भूस्खलन शुरू होते ही अपनी गाड़ी वहीं छोड़ दी और करीब सात किलोमीटर पैदल चलकर सुरक्षित स्थान की तलाश की।

छात्र आलोक और अम्रतांश अपने दो अन्य साथियों के साथ गंगोत्री की ओर गए थे। लौटते समय हर्षिल से कुछ आगे तेज बारिश और भूस्खलन के चलते वे रास्ते में ही फंस गए। हालात बिगड़ते देख सभी ने बिना समय गंवाए वाहन वहीं छोड़ दिया और नीचे की ओर पैदल दौड़ते हुए सुरक्षित स्थान की ओर निकल पड़े।

अम्रतांश के बड़े भाई एडवोकेट आदर्श कुमार ने बताया कि अंधेरा होने के कारण छात्र एक गांव में रुक गए। बुधवार सुबह वे सेना के संपर्क में आए, जिन्होंने उन्हें सुखी स्थित बेस कैंप में लाकर राहत दी। इसके बाद उन्हें चॉपर के जरिए उत्तरकाशी लाया गया, और फिर सेना के काफिले के साथ सड़क मार्ग से देहरादून भेजा गया।

रात करीब एक बजे सभी छात्र सुरक्षित रूप से दून पहुंचे। हालांकि मानसिक रूप से वे अभी भी इस भयावह अनुभव से उबर नहीं पाए हैं।

डीआईटी विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर नवीन सिंघल ने बताया कि आलोक और अम्रतांश बीसीए फाइनल ईयर के छात्र हैं। उन्हें विश्वविद्यालय में बुलाया गया है, जहां उनकी काउंसलिंग की जाएगी ताकि वे मानसिक रूप से स्थिर हो सकें।

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