
जन एक्सप्रेस/हरिद्वार(उत्तराखण्ड) : हरिद्वार के प्रसिद्ध मनसा देवी मंदिर में रविवार को हुई भगदड़ की दर्दनाक घटना में एक 12 वर्षीय मासूम की जान चली गई। उत्तर प्रदेश के बरेली से दर्शन के लिए आयी विमला देवी हादसे में स्वयं भी घायल हो गईं, लेकिन उन्हें अपने दर्द का अहसास तब तक नहीं हुआ जब तक उन्होंने अपने बेटे आरुष को खोजने की जद्दोजहद नहीं की। घटना स्थल पर चीख-पुकार के बीच विमला लगातार पुलिस और मेडिकल स्टाफ से बेटे को ढूंढने की गुहार लगाती रहीं। जब उन्हें बताया गया कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा, तो वह बदहवास होकर वहीं गिर पड़ीं। उनका बार-बार कहना था— “हम उड़न खटोले से जाने की सोच रहे थे… काश वही कर लिया होता, तो मेरा बेटा आज जिंदा होता।”
अपने जख्म भूल गई मां
भगदड़ में लगी गंभीर चोटों के बावजूद विमला का सारा ध्यान अपने बेटे पर था। जिला अस्पताल का इमरजेंसी वार्ड चीखों और दर्द से गूंज उठा, पर विमला को सिर्फ आरुष की चिंता थी। वह अपने दर्द को भूलकर बार-बार सिर्फ बेटे के पास ले जाने की गुहार करती रहीं।
भीड़ प्रबंधन पर उठे सवाल
यह हादसा एक बार फिर मंदिरों में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हादसे के समय सीढ़ी मार्ग पर अत्यधिक भीड़ थी, जिसे समय रहते नियंत्रित नहीं किया जा सका। प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन एक मां की गोद से उसका बेटा जा चुका है—जो कभी वापस नहीं आएगा।






