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4 साल का ‘कागजी वनवास’ खत्म: डीएम उत्तरकाशी ने 11 विभागों को 15 दिन का अल्टीमेटम

जन एक्सप्रेस /उत्तरकाशी:-  सीमा बदली, जिले बदले, लेकिन सरकारी फाइलें नहीं बदलीं। करीब चार वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा झेल रहे ग्राम पंचायत सौंदी के ग्रामीणों को आखिरकार राहत मिलने की उम्मीद जगी है। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने मामले का संज्ञान लेते हुए 11 विभागों को 15 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब है कि 30 नवंबर 2023 को ग्राम पंचायत सौंदी को टिहरी जनपद से अलग कर उत्तरकाशी की गाजणा पट्टी में शामिल कर दिया गया था। इसके बावजूद शिक्षा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, वन, सिंचाई, बाल विकास, खाद्यान्न, सहकारिता और पर्यटन समेत कई विभागों के अभिलेख और प्रशासनिक कार्य अब भी टिहरी से संचालित हो रहे थे। इससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी सरकारी सेवाओं के लिए भी दोनों जिलों के बीच भटकना पड़ रहा था।

गांव के जयपाल सिंह चौहान और पूर्व प्रधान आनंद सिंह पंवार ने 30 जून को जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर इस समस्या से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संबंधित विभाग जिम्मेदारी लेने के बजाय मामले को टिहरी का बताकर टाल रहे हैं।

शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने 2 जुलाई को पत्र संख्या 326 जारी कर सभी 11 विभागों के अधिकारियों को तलब किया। उन्होंने निर्देश दिए कि शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं पर नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए तथा इसकी जानकारी संबंधित पक्ष को भी उपलब्ध कराई जाए।

जिलाधिकारी की इस पहल से ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि अब उन्हें राशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए टिहरी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। यदि सभी विभाग समयबद्ध तरीके से रिकॉर्ड और फाइलों का हस्तांतरण पूरा कर देते हैं, तो सौंदी गांव के लोगों को सरकारी सेवाओं और योजनाओं का लाभ सीधे उत्तरकाशी प्रशासन के माध्यम से मिल सकेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि अब वास्तविक परीक्षा प्रशासन की है। यदि निर्धारित समय में सभी विभागों का कार्य पूरा हो जाता है, तो यह उत्तराखंड में सुशासन और जवाबदेह प्रशासन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण साबित होगा।

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