भारत के पास सिर्फ 50 दिनों का तेल स्टॉक, मध्य-पूर्व तनाव के बीच रूस ने बढ़ाया ‘ऊर्जा सहयोग’ का हाथ!

जन एक्सप्रेस/नई दिल्ली। वैश्विक भू-राजनीतिक संकट के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ी चिंता उठ रही है। सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि देश के पास क्रूड ऑयल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का कुल स्टॉक अब लगभग 50 दिनों तक ही पर्याप्त है — जिसमें करीब 25 दिनों का कच्चा तेल और 25 दिनों के गैसोलीन-डिज़ल स्टॉक शामिल हैं। यह भंडार होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली आपूर्ति में संभावित व्यवधान की आशंका के बीच महत्वपूर्ण बफर के रूप में देखा जा रहा है।मध्य-पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तीव्र तनाव और होर्मुज मार्ग पर संभावित व्यवधान ने वैश्विक तेल आपूर्ति को अस्थिर कर दिया है। भारत की करीब आधी तेल आपूर्ति इसी मार्ग के जरिए आती है, जिससे संकट और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।रूस ने किया ऊर्जा समर्थन का प्रस्तावऐसे समय में **Russia ने संकेत दिया है कि अगर खाड़ी क्षेत्र में जारी संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित होती है, तो वह भारत को आवश्यक ऊर्जा सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। रूस ने यह भरोसा दिया है कि आवश्यकतानुसार वह तेल और ऊर्जा उत्पादों की निरंतरता सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है, जिससे भारत को संभावित आपूर्ति संकट से निपटन में राहत मिल सकती है।कुछ सूत्रों ने यह भी बताया है कि रूस के पास समुद्र में ऐसे लगभग 9.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल के जहाज भारत की तरफ रवाना किए जा सकते हैं, जो अगर शीघ्र आपूर्ति की आवश्यकता पड़ी तो जल्दी भारत पहुंचे।
सरकार का क्या कहना है?
केंद्रीय मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों का कहना है कि देश के पास फिलहाल छोटी अवधि के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है और भारत आवश्यकतानुसार वैकल्पिक स्रोतों, मार्गों और रणनीतिक साझेदारियों के साथ ऊर्जा आपूर्ति के जोखिम को कम करने का प्रयास कर रहा है।
क्या आगे आ सकती है कीमतों में बढ़ोतरी?
विश्लेषक मानते हैं कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है और मध्य-पूर्व से निर्यात व्यवधान बढ़ता है, तो तेल की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है, जिससे पेट्रोल-डीज़ल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की घरेलू कीमतों में भी बढ़ोतरी का जोखिम बन सकता है।






