नदियों में घट रही ऑक्सीजन, ‘डेड जोन’ बनने का खतरा: डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल

जन एक्सप्रेस/उत्तरकाशी: उत्तरकाशी में पर्यावरण चिंतक डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल ने नदियों और झीलों में तेजी से घट रही ऑक्सीजन को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो नदियां ‘डेड जोन’ में बदल जाएंगी, जहां जलीय जीवन पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
गंगा विश्व धरोहर मंच के संयोजक डॉ. नौटियाल ने कहा कि पानी में ऑक्सीजन की कमी सबसे पहले मछलियों और जलीय पौधों को प्रभावित करती है। उनके मरने के बाद बैक्टीरिया उन्हें सड़ाने में बची हुई ऑक्सीजन भी खत्म कर देते हैं, जिससे नदी में केवल पानी बचता है, जीवन नहीं।
उन्होंने बताया कि नदियों में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। कारखानों का जहरीला पानी, शहरों के गंदे नाले और प्लास्टिक कचरा सीधे नदियों में छोड़ा जा रहा है। इसके अलावा खेतों में इस्तेमाल होने वाले रासायनिक खाद और कीटनाशक बारिश के साथ बहकर नदी में पहुंच रहे हैं।
डॉ. नौटियाल ने ग्लोबल वार्मिंग को भी बड़ी वजह बताया। उनका कहना है कि तापमान बढ़ने से पानी गर्म हो रहा है और गर्म पानी में ऑक्सीजन कम मात्रा में टिक पाती है, जिससे जलीय जीवों पर खतरा बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं बल्कि मानव जीवन से जुड़ा गंभीर संकट है। यदि नदियां प्रदूषित और ऑक्सीजन विहीन हो गईं तो पीने का पानी, खेती और खाद्य श्रृंखला सभी प्रभावित होंगे।
पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्होंने सरकार और आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि नदियों में कचरा डालना बंद किया जाए, उद्योगों का गंदा पानी शुद्ध कर ही छोड़ा जाए, अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाएं और जल संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने कहा कि गंगा और अन्य नदियों को बचाना केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व का सवाल है।






