
जन एक्सप्रेस / रानीखेत : राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रानीखेत की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बबीता कांडपाल को गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान द्वारा 10 लाख 95 हजार रुपये की राष्ट्रीय शोध परियोजना स्वीकृत की गई है। तीन वर्ष की अवधि वाली इस परियोजना की स्वीकृति से महाविद्यालय में खुशी का माहौल है।
“हरित समृद्धि : फलों, सुगंधित एवं औषधीय पौधों की खेती और प्रसंस्करण के माध्यम से ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाना” विषय पर आधारित इस परियोजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग को प्रोत्साहित करना तथा वैज्ञानिक खेती और प्रसंस्करण के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।
यह शोध परियोजना पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सतत विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। परियोजना में डॉ. बबीता कांडपाल को प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर (PI) की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि डॉ. भारती रौतेला को-प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर (Co-PI) के रूप में परियोजना से जुड़ी रहेंगी।
डॉ. कांडपाल इससे पहले भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद तथा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की शोध परियोजनाओं में भी को-प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर के रूप में कार्य कर चुकी हैं। शोध और अकादमिक क्षेत्र में उनके योगदान को व्यापक सराहना मिलती रही है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पाण्डेय ने इस उपलब्धि पर डॉ. कांडपाल को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि न केवल महाविद्यालय बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह परियोजना ग्रामीण विकास, स्वरोजगार सृजन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
महाविद्यालय परिवार एवं शिक्षकों ने भी इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे संस्थान की शोध और शैक्षणिक गतिविधियों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया है।






