
जन एक्सप्रेस/ नई टिहरी: रामगांव की गोचर भूमि की प्रस्तावित नीलामी के विरोध में पैतृक भूमि संरक्षण समिति का धरना शनिवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। धरना स्थल पर समिति के पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने एक स्वर में नीलामी का विरोध करते हुए इसे ग्रामीणों के हितों के खिलाफ बताया।
समिति के अध्यक्ष नत्थी सिंह कैंतुरा ने बताया कि 29 जून को ढोल-दमाऊं के साथ देवताओं का आह्वान कर गोचर भूमि की रक्षा के लिए पारंपरिक मन्डाण का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन स्थानीय संस्कृति और जनभावनाओं के अनुरूप शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ाया जाएगा।
पूर्व कनिष्ठ प्रमुख थौलधार कुलदीप सिंह पंवार ने कहा कि जिस गोचर भूमि की नीलामी प्रस्तावित है, वह वर्षों से ग्रामीणों की आजीविका का आधार रही है। इसी भूमि से पशुओं के लिए चारा, घास, जलाऊ लकड़ी तथा अंतिम संस्कार के लिए आवश्यक लकड़ी प्राप्त होती है। इसके साथ ही यह भूमि वन्यजीवों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने सरकार से नीलामी का निर्णय तत्काल वापस लेने की मांग की।
धरने में वक्ताओं ने उत्तराखंड की भौगोलिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य में सख्त भू-कानून लागू करने की मांग की। उनका कहना था कि स्थानीय लोगों की जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए प्रभावी संवैधानिक संरक्षण जरूरी है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक नीलामी का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।
धरने में विधायक विक्रम सिंह नेगी, पूर्व कनिष्ठ प्रमुख कुलदीप सिंह पंवार, अत्तर सिंह






