
जन एक्सप्रेस/ पुरोला: लाल धान का कटोरा कहलाने वाले प्रखंड पुरोला के रामा और कमल सिराई गांवों में इन दिनों पारंपरिक लाल धान की रोपाई पूरे उत्साह के साथ की जा रही है। खेतों में किसानों के साथ महिलाएं और युवा भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। सामूहिक श्रम, लोकगीत और आपसी सहयोग की परंपरा आज भी यहां की कृषि संस्कृति को जीवंत बनाए हुए है।
लाल धान अपनी विशेष गुणवत्ता, स्वाद और पौष्टिकता के कारण राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखता है। स्थानीय किसान पीढ़ियों से इसकी खेती करते आ रहे हैं। मानसून की अच्छी शुरुआत के बाद किसान समय पर रोपाई में जुटे हैं और इस वर्ष बेहतर उत्पादन की उम्मीद जता रहे हैं।
रोपाई के दौरान खेतों में पारंपरिक लोकगीतों की गूंज पूरे माहौल को उत्सव का रूप दे रही है। किसान पवन नोटियाल, दीपक नोटियाल और कमलनयन का कहना है कि लाल धान केवल एक फसल नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का प्रतीक है।
किसानों का मानना है कि पारंपरिक लाल धान की खेती को बढ़ावा देने से स्थानीय किसानों की आय बढ़ेगी, जैव विविधता का संरक्षण होगा और पारंपरिक बीजों को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा। किसानों ने सरकार से लाल धान के लिए विशेष प्रोत्साहन, बेहतर विपणन व्यवस्था और उचित समर्थन मूल्य उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि अधिक से अधिक किसान इस पारंपरिक फसल की खेती के लिए प्रेरित हो सकें।






