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शहीद की याद में बनी सड़क बदहाल, 10 किमी का सफर तय करने में लगते हैं ढाई घंटे

जन एक्सप्रेस / कौशांबी: वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के शहीद दुर्गविजय सिंह की स्मृति में वर्ष 2009 में बनाई गई सड़क आज खुद बदहाली का शिकार है। शहीद की पत्नी की मांग पर निर्मित यह सड़क, जो कभी सम्मान और विकास का प्रतीक मानी गई थी, अब गहरे गड्ढों और टूटी-फूटी सतह के कारण लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। हालत यह है कि महज 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में लोगों को दो से ढाई घंटे तक का समय लग रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के बाद इसके रखरखाव और मरम्मत पर कभी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। आईजीआरएस पोर्टल समेत कई माध्यमों से शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन हर बार बजट का अभाव बताकर मामला बंद कर दिया गया।

बारिश के मौसम में सड़क की स्थिति और भी खराब हो जाती है। गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। स्कूली बच्चों, मरीजों और गर्भवती महिलाओं को इस मार्ग से गुजरने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों के अनुसार यह सड़क केवल एक गांव की नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों की जीवनरेखा है। इसी मार्ग से हजारों लोग प्रतिदिन आवागमन करते हैं और यह सड़क पड़ोसी जनपद चित्रकूट को भी जोड़ती है।

प्रदेश में गड्ढामुक्त सड़कों के दावों के बीच कौशांबी की यह सड़क सवाल खड़े कर रही है। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया था, लेकिन यह सड़क आज भी जर्जर हालत में है। यह क्षेत्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का गृह जनपद भी है, जहां लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी भी पहले उनके पास रह चुकी है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि जिलाधिकारी डॉ. अमित पाल ने सड़क की स्थिति में जल्द सुधार का भरोसा दिया है।

वहीं, लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिशासी अभियंता दयाशंकर सोनी ने बताया कि इस सड़क के पुनर्निर्माण और मरम्मत का प्रस्ताव तीन बार लखनऊ मुख्यालय भेजा जा चुका है, लेकिन बजट स्वीकृत नहीं होने के कारण कार्य शुरू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि विभाग एक बार फिर प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहा है और बजट मिलने पर सड़क का कार्य कराया जाएगा।

अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन और सरकार जल्द इस सड़क की मरम्मत कराकर लोगों को राहत देगी।

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