कानपुर में बिक रही थी कुत्ते के काटे की नकली दवा, WhatsApp चैट ने खोली सप्लाई की पोल

जन एक्सप्रेस / कानपुर: कुत्ते के काटने के बाद रेबीज से बचाव के लिए एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी माना जाता है। लेकिन कानपुर में इसी जीवनरक्षक दवा के नाम पर कथित तौर पर नकली वैक्सीन की सप्लाई किए जाने का मामला सामने आया है। दिल्ली पुलिस और कानपुर के औषधि विभाग की जांच में नकली Abhayrab एंटी-रेबीज वैक्सीन की सप्लाई के तार कानपुर के बिराना रोड स्थित दवा बाजार तक पहुंचने की बात सामने आई है।
मामले में कलक्टरगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। जांच के दौरान सामने आई WhatsApp चैट और कथित फर्जी बिलों को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। पुलिस और औषधि विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि नकली वैक्सीन की सप्लाई कहां से हुई और यह नेटवर्क कितने लोगों तक फैला हुआ है।

दिल्ली से शुरू हुई नकली वैक्सीन की जांच
मामले की शुरुआत दिल्ली के भागीरथ पैलेस से बताई जा रही है। यहां Abhayrab नाम की एंटी-रेबीज वैक्सीन की खेप पकड़ी गई थी। जांच के बाद संबंधित निर्माता कंपनी की ओर से कथित तौर पर बताया गया कि बरामद वैक्सीन उनकी कंपनी द्वारा निर्मित नहीं की गई थी।
इसके बाद दिल्ली ड्रग कंट्रोल विभाग ने नकली वैक्सीन की सप्लाई के स्रोत का पता लगाने के लिए जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ी तो इसका कनेक्शन कानपुर के बिराना रोड स्थित न्यू आरजे एजेंसी से जुड़ने की बात सामने आई।
इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीम ने कानपुर में रात के समय छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान फर्म संचालक राजिन्दर सिंह उर्फ हरजिंदर सिंह को हिरासत में लिया गया और पुलिस उसे अपने साथ दिल्ली ले गई।
न्यू आरजे एजेंसी और एलिक्सिर क्योर जांच के घेरे में
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद कानपुर औषधि विभाग ने भी मामले की जांच शुरू की। विभाग की टीम ने न्यू आरजे एजेंसी के अलावा एलिक्सिर क्योर नाम की फर्म की भी जांच की।
पूछताछ के दौरान दोनों पक्षों की ओर से कथित तौर पर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाली गई। न्यू आरजे एजेंसी के राजिन्दर सिंह ने जांच अधिकारियों को बताया कि उसने संबंधित वैक्सीन एलिक्सिर क्योर के मालिक तरनदीप सिंह से खरीदी थी।
वहीं, जांच के दौरान तरनदीप सिंह ने कथित तौर पर वैक्सीन बेचने से इनकार किया। इसके बाद औषधि विभाग ने दस्तावेजों और मोबाइल चैट समेत अन्य रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
WhatsApp चैट से सामने आया कथित फर्जी बिल का राज
जांच में WhatsApp चैट को अहम सुराग बताया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, राजिन्दर सिंह ने अपना मोबाइल फोन औषधि निरीक्षक ओमपाल सिंह को दिखाया।
मोबाइल में मौजूद WhatsApp बातचीत में कथित तौर पर तरनदीप सिंह की ओर से बिल भेजे जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद ड्रग इंस्पेक्टर ने उसी नंबर पर फोन किया। पुलिस के मुताबिक, संबंधित कॉल तरनदीप सिंह ने रिसीव की।
इसके बाद जांच अधिकारियों ने WhatsApp चैट और कथित बिलों को मामले की जांच में शामिल किया। औषधि विभाग अब डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि दवा की खरीद-बिक्री और सप्लाई किस तरह हुई थी।
839 शीशियों का भी सामने आया मामला
मामले की जांच के दौरान 839 शीशियों का एक और महत्वपूर्ण विवरण सामने आया है। बताया गया कि आगरा की एक फर्म ने नकली होने के संदेह में 839 शीशियां राजिन्दर सिंह को वापस की थीं।
जांच के दौरान इन शीशियों के बारे में पूछताछ की गई तो कथित तौर पर यह स्पष्ट नहीं हो सका कि वापस की गई वैक्सीन बाद में कहां गई। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन शीशियों का क्या हुआ और क्या इन्हें दोबारा बाजार में भेजा गया था।
अगर जांच में यह आरोप सही साबित होता है तो मामला मरीजों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा हुआ है, क्योंकि एंटी-रेबीज वैक्सीन का इस्तेमाल संभावित रेबीज संक्रमण से बचाव के लिए किया जाता है।
तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज
औषधि निरीक्षक देवयानी दुबे की तहरीर पर कलक्टरगंज थाने में मामले की एफआईआर दर्ज कराई गई है। पुलिस के मुताबिक, मुकदमे में न्यू आरजे एजेंसी की बलजीत कौर और राजिन्दर सिंह तथा एलिक्सिर क्योर के तरनदीप सिंह के नाम शामिल हैं।
इनके खिलाफ BNS 2023 की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस और औषधि विभाग अब मामले से जुड़े दस्तावेजों, दवा की सप्लाई और कथित नकली वैक्सीन की मात्रा की जांच कर रहे हैं।
एसडीएम ने बताई कार्रवाई की पूरी कड़ी
मामले में एसडीएम सौरभ सिंह के मुताबिक, दिल्ली में नकली एंटी-रेबीज वैक्सीन पकड़े जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने कानपुर में छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद कानपुर औषधि विभाग की टीम ने मामले की जांच की और जांच के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई गई।
अब जांच का अगला चरण नकली वैक्सीन के पूरे नेटवर्क का पता लगाना है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित नकली वैक्सीन कहां से आई, किन फर्मों के जरिए इसकी सप्लाई हुई और यह दवा कितनी दूर तक पहुंची।





