कानपुर में सड़क हादसों में 11.7% की कमी, 15,478 चालान के साथ सड़क सुरक्षा पर जोर

जिला संवाददाता – विवेक पांडेय
जन एक्सप्रेस / कानपुर: कानपुर नगर में सड़क सुरक्षा को लेकर चलाए जा रहे अभियानों का असर सड़क हादसों के आंकड़ों में दिखाई देने लगा है। परिवहन विभाग के मुताबिक, वर्ष 2026 में जनवरी से जुलाई के बीच कानपुर में सड़क हादसों की संख्या पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 11.7 फीसदी कम हुई है। हादसों के साथ-साथ सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों और घायलों की संख्या में भी कमी दर्ज की गई है।
एआरटीओ प्रवर्तन कहकशा खातून ने सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े आंकड़ों की जानकारी देते हुए बताया कि जनवरी से जुलाई 2026 के बीच कानपुर नगर में कुल 783 सड़क हादसे दर्ज किए गए। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में यह संख्या 11.7 फीसदी कम है।
सड़क हादसों में 11.7 फीसदी की गिरावट
परिवहन विभाग के अनुसार, सड़क सुरक्षा के लिए लगातार चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों, सड़क सुधार और यातायात नियमों के पालन को लेकर की जा रही कार्रवाई के बीच हादसों की संख्या में कमी आई है।
एआरटीओ प्रवर्तन के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान 783 एक्सीडेंट हुए। वर्ष 2025 की समान अवधि से तुलना करने पर हादसों में 11.7 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।
विभाग का कहना है कि सड़क सुरक्षा के लिए अलग-अलग स्तर पर किए जा रहे प्रयासों का उद्देश्य दुर्घटनाओं को कम करने के साथ-साथ सड़क हादसों में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को भी रोकना है।
सड़क हादसों में मौतों में भी कमी
सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों के आंकड़ों में भी पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। विभाग के अनुसार, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच सड़क हादसों में 334 लोगों की मौत हुई।
पिछले वर्ष की समान अवधि से तुलना करने पर सड़क दुर्घटनाओं में मौतों की संख्या में 4.8 फीसदी की कमी बताई गई है। हालांकि हादसों में होने वाली मौतों को कम करना अब भी सड़क सुरक्षा व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती है।
घायलों की संख्या 25.6 फीसदी घटी
सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले लोगों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। विभाग के मुताबिक इस साल जनवरी से जुलाई के बीच 558 लोग घायल हुए।
पिछले वर्ष की तुलना में घायलों की संख्या में 25.6 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। परिवहन विभाग इसे सड़क सुरक्षा अभियानों के तहत किए जा रहे विभिन्न प्रयासों का परिणाम बता रहा है।
4-E कॉन्सेप्ट पर जोर
कानपुर में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियां 4-E कॉन्सेप्ट पर काम कर रही हैं। इसमें Engineering, Education, Enforcement और Emergency Care को शामिल किया गया है।
Engineering के तहत NHAI और PWD जैसी सड़क निर्माण एवं रखरखाव एजेंसियों के जरिए ब्लैक स्पॉट सुधारने, रंबल स्ट्रिप और अन्य ट्रैफिक उपायों पर काम किया जा रहा है।
Education के तहत स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। BSA, माध्यमिक और उच्च शिक्षण संस्थानों में भाषण, लेखन, चित्रकला प्रतियोगिताओं और रोड सेफ्टी क्लबों के जरिए विद्यार्थियों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

अप्रैल से अब तक 15,478 चालान
Enforcement के तहत यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। विभाग के मुताबिक अप्रैल से अब तक कुल 15,478 चालान किए गए हैं।
इनमें सीट बेल्ट का इस्तेमाल नहीं करने पर 5,213 चालान, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर 2,408 चालान, ड्रंक एंड ड्राइव के 146 चालान और रॉन्ग साइड वाहन चलाने पर 2,519 चालान शामिल हैं।
विभाग का कहना है कि नियमों का पालन कराने के लिए प्रवर्तन कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
गोल्डन ऑवर में इलाज पर जोर
4-E कॉन्सेप्ट के चौथे हिस्से Emergency Care के तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर के दौरान जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
इसके अलावा कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम के तहत नामित अस्पतालों में घायल व्यक्ति को डेढ़ लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। इसका उद्देश्य दुर्घटना के बाद घायल को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
स्कूल बसों की सुरक्षा के लिए मिशन सेफ फ्यूचर 3.0
सड़क सुरक्षा के साथ-साथ स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर भी विभाग का फोकस है। इसके लिए मिशन सेफ फ्यूचर 3.0 चलाया जा रहा है।
विभाग के अनुसार स्कूल बसों में अटेंडेंट की मौजूदगी अनिवार्य है। अगर बस में बालिकाएं सफर कर रही हैं तो महिला अटेंडेंट का होना जरूरी किया गया है।
परिवहन विभाग का कहना है कि सड़क सुरक्षा के लिए Engineering, Education, Enforcement और Emergency Care के स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब विभाग की कोशिश हादसों, मौतों और घायलों की संख्या में आई कमी को आगे भी बनाए रखने और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की है।






