कानपुर कचहरी में हिंदी पखवाड़े पर काव्य उत्सव, कल 3 जज और 3 वकील होंगे सम्मानित

जिला संवाददाता – विवेक पांडेय
जन एक्सप्रेस / कानपुर: कानपुर कचहरी में चल रहे हिंदी पखवाड़े के तहत सोमवार को काव्य उत्सव और कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के जाने-माने कवियों और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं का पाठ कर हिंदी भाषा की साहित्यिक समृद्धि और उसकी उपयोगिता को सामने रखा। कवियों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद अधिवक्ताओं, न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोगों और साहित्य प्रेमियों को भाव-विभोर कर दिया।
कानपुर कचहरी में 14 सितंबर से 30 सितंबर तक हिंदी पखवाड़ा मनाया जा रहा है। इसी क्रम में आयोजित काव्य उत्सव का आयोजन हिंदी विधि प्रतिष्ठान, कानपुर बार एसोसिएशन और LAAS एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कवियों ने काव्य पाठ से बांधा समां
काव्य उत्सव में शहर के प्रसिद्ध कवि मनीष मीत, अंसार कंबरी, अजय नीरू श्रीवास्तव, प्रतिमा दीक्षित और अरुण तिवारी ने काव्य पाठ किया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से हिंदी भाषा, समाज और जीवन से जुड़े विभिन्न विषयों को अभिव्यक्ति दी।
कार्यक्रम के दौरान कवियों की प्रस्तुतियों को मौजूद लोगों ने सराहा। काव्य पाठ के साथ कार्यक्रम में हिंदी साहित्य और हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को लेकर भी चर्चा हुई।
आयोजकों का कहना है कि हिंदी पखवाड़े के तहत होने वाले साहित्यिक कार्यक्रमों का उद्देश्य सिर्फ हिंदी भाषा के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाना नहीं है, बल्कि न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के अधिक से अधिक प्रयोग को प्रोत्साहित करना भी है।
14 से 30 सितंबर तक हिंदी पखवाड़ा
हिंदी पखवाड़े के तहत कानपुर कचहरी में अलग-अलग साहित्यिक और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसमें अधिवक्ताओं के लिए निबंध लेखन और पत्र लेखन जैसी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।
कानपुर बार एसोसिएशन के महामंत्री विनय मिश्र ने बताया कि कचहरी में हर साल 14 से 30 सितंबर के बीच हिंदी पखवाड़ा मनाया जाता है। इस दौरान न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और अधिवक्ताओं को हिंदी में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि हिंदी पखवाड़े के तहत आयोजित काव्य सम्मेलन इसी श्रृंखला का हिस्सा है। इसका उद्देश्य न्यायिक क्षेत्र में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देना और हिंदी को कार्यालयी कार्यों का अधिक प्रभावी माध्यम बनाना है।
कल होगा हिंदी पखवाड़े का समापन
कानपुर कचहरी में चल रहे हिंदी पखवाड़े का 30 सितंबर को समापन होगा। समापन कार्यक्रम में न्यायिक क्षेत्र और अधिवक्ताओं को उनके हिंदी में किए गए कार्यों के लिए सम्मानित किया जाएगा।
महामंत्री विनय मिश्र के मुताबिक, समापन समारोह में पूरे वर्ष हिंदी में कार्य करने वाले तीन न्यायाधीशों को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा अधिवक्ताओं के लिए आयोजित निबंध लेखन प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले तीन अधिवक्ताओं को भी सम्मानित किया जाएगा।
आयोजकों के अनुसार सम्मान समारोह का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं को हिंदी में काम करने के लिए प्रोत्साहित करना है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में हिंदी का इस्तेमाल और अधिक बढ़ सके।
न्यायिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग पर जोर
हिंदी पखवाड़े के आयोजन के पीछे मुख्य उद्देश्य न्यायिक अधिकारी, कर्मचारी और अधिवक्ताओं को हिंदी में अधिक से अधिक कार्य करने के लिए प्रेरित करना है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े दस्तावेज और कामकाज आम लोगों तक आसानी से पहुंच सकें, इसके लिए सरल और सहज भाषा का इस्तेमाल महत्वपूर्ण है। हिंदी के अधिक प्रयोग से आम लोगों को न्यायिक प्रक्रिया को समझने में सुविधा मिलने की उम्मीद जताई गई।
साहित्य के जरिए हिंदी को कार्यालयों तक पहुंचाने की पहल
कवयित्री प्रतिमा दीक्षित ने कहा कि कानपुर कचहरी में हर साल हिंदी पखवाड़े के दौरान साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें निबंध लेखन और पत्र लेखन जैसी प्रतियोगिताएं भी शामिल होती हैं।
उन्होंने कहा कि काव्य सम्मेलन के जरिए कवियों का उद्देश्य अपनी कविताओं और अभिव्यक्ति के माध्यम से हिंदी को कार्यालयों तक पहुंचाना है। उनका कहना है कि हिंदी का इस्तेमाल इस तरह बढ़ना चाहिए कि कामकाज से जुड़ी जानकारी अंतिम व्यक्ति तक उसकी समझ की भाषा में पहुंच सके।
अधिवक्ता और साहित्य प्रेमी रहे मौजूद
काव्य उत्सव में कानपुर बार एसोसिएशन के पदाधिकारी, अधिवक्ता, पत्रकार और बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान हिंदी भाषा और साहित्य को लेकर उत्साह देखने को मिला।
अब सभी की नजर हिंदी पखवाड़े के समापन कार्यक्रम पर है, जहां तीन न्यायाधीशों और तीन अधिवक्ताओं को सम्मानित किया जाएगा। आयोजन समिति के मुताबिक, हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने और न्यायिक कार्यों में इसके इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने के लिए आगे भी इस तरह के कार्यक्रम जारी रहेंगे।






