
ब्यूरो जन एक्सप्रेस – दीपक मिशवाण
जन एक्सप्रेस /नई टिहरी :- देश डिजिटल युग में प्रवेश कर चुका है। चिकित्सा क्षेत्र में अत्याधुनिक मशीनों और तकनीक के इस्तेमाल से जांच और उपचार की सुविधाएं लगातार बेहतर हो रही हैं। लेकिन टिहरी जिले के बौराड़ी स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. औतार सिंह तोपाल राजकीय चिकित्सालय की एक तस्वीर स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।
सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीर के अनुसार, अस्पताल में एक्स-रे फिल्म की जांच के लिए खिड़की से आने वाली प्राकृतिक रोशनी का सहारा लिए जाने का मामला सामने आया है।
यदि तस्वीर में दिखाई दे रही स्थिति वास्तव में नियमित जांच व्यवस्था का हिस्सा है, तो यह अस्पताल की तकनीकी सुविधाओं और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही आधुनिक जांच व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।आज जब डिजिटल एक्स-रे, हाई-रेजोल्यूशन डिस्प्ले और आधुनिक इमेजिंग तकनीक चिकित्सा संस्थानों में सामान्य होती जा रही है, ऐसे में एक्स-रे फिल्म को खिड़की की रोशनी के सामने देखकर जांच करने की स्थिति स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय हो सकती है।मरीजों की जांच और रिपोर्ट की गुणवत्ता पर सवालएक्स-रे की सही व्याख्या के लिए पर्याप्त प्रकाश और उपयुक्त देखने की व्यवस्था जरूरी होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि अस्पताल में एक्स-रे फिल्म देखने के लिए समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं है तो मरीजों की जांच और चिकित्सकीय निर्णय किस प्रकार किए जा रहे हैं?
बौराड़ी अस्पताल टिहरी जनपद के महत्वपूर्ण सरकारी चिकित्सालयों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के साथ ही दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल में आधुनिक जांच सुविधाओं, उपकरणों और उनके उचित संचालन की व्यवस्था होना बेहद महत्वपूर्ण है। जिम्मेदारों से जवाब की अपेक्षामामले में स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि अस्पताल में एक्स-रे देखने के लिए आधुनिक व्यवस्था उपलब्ध है या नहीं। यदि उपलब्ध है तो उसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है और यदि व्यवस्था उपलब्ध नहीं है तो उसे कब तक दुरुस्त किया जाएगा। तस्वीर सवाल पूछ रही है—जब चिकित्सा विज्ञान डिजिटल युग में पहुंच चुका है, तो सरकारी अस्पताल में एक्स-रे जांच के लिए खिड़की की रोशनी का सहारा क्यों?






