“चुप्पी तोड़; हल्ला बोल” परियोजना के तहत हरदोई में बच्चों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

जन एक्सप्रेस/ हरदोई: आक्रामकता एवं हिंसा के शिकार मासूम बच्चों के अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर समाधान अभियान द्वारा संचालित “चुप्पी तोड़; हल्ला बोल” परियोजना के अंतर्गत एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इंडिया पेस्टिसाइड लिमिटेड के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में संप्रेक्षण ग्रह हरदोई के बच्चों को बाल सुरक्षा, अधिकारों और बाल यौन शोषण से बचाव के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन बाल मित्र केंद्र, थाना देहात कोतवाली के माध्यम से किया गया, जिसमें बच्चों को सुरक्षित जीवन, आत्मरक्षा और किसी भी प्रकार के शोषण या हिंसा की स्थिति में सहायता प्राप्त करने के तरीकों के बारे में विस्तार से जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संप्रेक्षण ग्रह अधीक्षक सौरभ पाठक उपस्थित रहे। वहीं विधि सह परिवीक्षा अधिकारी संजीव कुमार श्रीवास्तव विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। दोनों अधिकारियों ने बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं।
मुख्य अतिथि सौरभ पाठक ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक और सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने बच्चों को बताया कि यदि किसी भी प्रकार की हिंसा, उत्पीड़न या शोषण का सामना करना पड़े तो बिना किसी डर या संकोच के बाल कल्याण समिति से संपर्क करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाल कल्याण समिति जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा, संरक्षण, परामर्श और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध है तथा बच्चों के सर्वोत्तम हितों की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जाते हैं।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के लिए विभिन्न हैप्पीनेस गतिविधियों का आयोजन भी किया गया। साथ ही जलपान की व्यवस्था की गई, जिससे बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए सीखने और मनोरंजन दोनों का अनुभव प्राप्त किया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास और जागरूकता को बढ़ाना था।
समाधान अभियान की निर्देशिका सौम्या द्विवेदी के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का संचालन समन्वयक प्रियांशु अवस्थी, मृदुल अवस्थी और सूरज शुक्ला द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने और उन्हें सुरक्षित वातावरण प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाल सुरक्षा और बाल अधिकारों से जुड़े ऐसे कार्यक्रम बच्चों में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में भी सहायक साबित होते हैं।






