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अस्पताल का निर्माणाधीन लिफ्ट बनी मौत का फंदा!

75 वर्षीय वृद्धा की दर्दनाक मौत से मचा कोहराम, अस्पताल प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल

जन एक्सप्रेस/ शाहगंज: जौनपुर के शाहगंज नगर के आर के हड्डी अस्पताल में रविवार की रात जो हुआ, उसने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। एक 75 वर्षीय वृद्धा की जान उस लिफ्ट ने ले ली… जो अभी बनी भी नहीं थी!

बिना किसी सुरक्षा घेरे, बिना चेतावनी बोर्ड और बिना रोशनी के खुले लिफ्ट डक ने एक निरीह महिला को निगल लिया – और 24 घंटे तक अस्पताल को उसकी खबर तक नहीं हुई। क्या यही है हमारे स्वास्थ्य तंत्र की हकीकत?

तीमारदारी करने आईं थीं, मौत साथ ले गईपुराना चौक मोहल्ला निवासी 75 वर्षीय बिटन देवी अपने बीमार पति कामता प्रसाद की देखभाल के लिए रविवार रात अस्पताल आई थीं। मगर उन्हें क्या पता था कि जो अस्पताल इलाज का केंद्र होना चाहिए, वहीं उनकी मौत का कारण बन जाएगा।

रात के अंधेरे में वह निर्माणाधीन लिफ्ट के डक में गिर गईं। इतना गहरा गड्ढा था कि उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

अंधेरे में जाल, खुले गड्ढे में मौत

अस्पताल की लापरवाही इस कदर थी कि न तो वहां रोशनी थी, न कोई चेतावनी बोर्ड और न ही कोई बैरिकेडिंग। खुले लिफ्ट शाफ्ट में गिरना किसी के लिए भी आसान था — लेकिन सुरक्षा नाम की चीज़ मानो अस्पताल में थी ही नहीं।

24 घंटे बाद मिला शव, पूरे इलाके में मचा हड़कंप

सबसे शर्मनाक बात – 24 घंटे तक किसी को यह नहीं पता चला कि एक महिला अस्पताल के ही गड्ढे में पड़ी है! परिजन इधर-उधर खोजते रहे, लेकिन जवाब किसी के पास नहीं था। सोमवार रात 8 बजे एक कर्मचारी की नजर जब लिफ्ट के गड्ढे में गई तो वहां बिटन देवी का शव पड़ा मिला।

पहचान होते ही परिजनों में मचा कोहराम

जब शव की पहचान हुई, तो पूरा माहौल ग़मगीन हो गया। परिजन बेसुध हो गए। किसी ने सोचा भी नहीं था कि एक बुज़ुर्ग महिला की जान महज़ लापरवाही की भेंट चढ़ जाएगी।

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग सवालों के घेरे में

अब सवाल उठ रहे हैं –

जब लिफ्ट निर्माणाधीन थी, तो सुरक्षा घेरा क्यों नहीं था?

अस्पताल में रोशनी की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं थी?

और सबसे अहम – एक शव अस्पताल में 24 घंटे तक अनदेखा कैसे रहा?

यह हादसा निजी अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की धज्जियाँ उड़ाने का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है।

स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा

“ये हादसा नहीं, सीधी हत्या है। लिफ्ट निर्माण क्षेत्र को पूरी तरह सील क्यों नहीं किया गया?”
– रमेश यादव, स्थानीय निवासी

“अगर समय रहते देखा जाता, तो शायद जान बच जाती। अस्पताल प्रशासन को बख्शा नहीं जाना चाहिए।”
– सीमा श्रीवास्तव, सामाजिक कार्यकर्ता

सीएमओ ने जांच के दिए आदेश

सीएमओ डॉक्टर लक्ष्मी सिंह ने कहा, “घटना गंभीर है। जांच करवाई जा रही है, दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।”

सवालों के जवाब कौन देगा?

क्या जान की कीमत इतनी सस्ती है?

निर्माणस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं हुआ?

क्या हर निजी अस्पताल में ऐसे ही जानलेवा इंतज़ाम हैं?

और… कब तक लापरवाही की कीमत आम आदमी अपनी जान देकर चुकाता रहेगा?

अब नहीं चलेगा चुप रहना!

यह हादसा चेतावनी है – प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पतालों को। अगर अब भी नींद नहीं टूटी, तो अगला शिकार कोई और हो सकता है।

परिजन और स्थानीय लोग अब एकजुट होकर न्याय की मांग कर रहे हैं। अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग ज़ोर पकड़ रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इसे एक और ‘फाइल बंद’ मामला बनाएगा या इंसाफ के दरवाज़े खोलेगा।

जन एक्सप्रेस इस खबर पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।

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