देश

उदासीनता के चलते हम भूले हैं अपनी समुद्री विरासत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि ‘‘लंबे समय तक गुलामी’’ और उदासीनता के कारण हमने भारत के समृद्ध समुद्री इतिहास को भुला दिया। गुजरात के अहमदाबाद जिले में लोथल के राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के निर्माण की समीक्षा करने के बाद वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह इस इतिहास के बारे में जानने के एक केंद्र के तौर पर काम करेगा। मोदी ने बाद में ट्वीट किया कि लोथल परिसर अपने समृद्ध समुद्री इतिहास पर गर्व करने, के देश के संकल्प को दिखाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘सदियों पहले भारत का व्यापार-कारोबार दुनिया के एक बड़े हिस्से में छाया हुआ था। हमारे रिश्ते दुनिया की हर सभ्यता के साथ रहे, तो इसके पीछे भारत की समुद्री शक्ति की बहुत बड़ी भूमिका थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘भारत की समुद्री ताकत के प्रति लंबे समय तक गुलामी और उदासीनता के कारण हमने लोथल और धोलावीरा को भुला दिया जो समुद्री व्यापार के लिए प्रसिद्ध थे।’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोथल में परिसर को ऐसा बनाया जा रहा है कि भारत का सामान्य से सामान्य व्यक्ति भी इस इतिहास को आसानी से जान सके, समझ सके। उन्होंने कहा, ‘‘इसमें अति आधुनिक तकनीक का प्रयोग करके, बिल्कुल उस युग को फिर से सजीव करने का प्रयास किया जा रहा है।’’ उन्होंने कहा कि भारत की समुद्री विरासत को भुला दिया गया और अगली पीढ़ी के लिए इसे संरक्षित करने के वास्ते कुछ नहीं किया गया।

मोदी ने कहा, ‘‘इतिहास की उन घटनाओं से हम कितना कुछ सीख सकते थे। भारत की समुद्री विरासत भी ऐसा विषय है, जिसके बारे में बहुत कम चर्चा की गयी है।’’ प्रधानमंत्री ने दावा किया कि भारतीय इतिहास के कई गौरवान्वित अध्याय हैं जैसे कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी एक सशक्त नौसेना का गठन किया और विदेशी आक्रांताओं को चुनौती दी थी।

उन्होंने कहा कि हजारों वर्ष पहले कच्छ में बड़े-बड़े समुद्री जहाजों के निर्माण का पूरा उद्योग चला करता था और भारत में बने जहाज दुनियाभर में बेचे जाते थे। उन्होंने कहा, ‘‘विरासत के प्रति इस उदासीनता ने देश का बहुत नुकसान किया। यह स्थिति बदलना जरूरी है। हमने तय किया है कि धोलावीरा और लोथल को, भारत के गौरव के इन केंद्रों को हम उसी रूप में लौटाएंगे, जिसके लिए ये कभी मशहूर थे।’’

मोदी ने कहा कि लोथल सिर्फ सिंधु घाटी सभ्यता का एक बड़ा व्यापारिक केंद्र ही नहीं था, बल्कि यह भारत के सामुद्रिक सामर्थ्य और समृद्धि का भी प्रतीक था। उन्होंने कहा कि हजारों साल पहले लोथल को जिस तरीके से एक पोर्ट सिटी के रूप में विकसित किया गया था, वह आज भी बड़े-बड़े जानकारों को हैरान कर देता है।

JAN EXPRESS

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