जन एक्सप्रेस। लखनऊ/वाराणसी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को वाराणसी (काशी) में आयोजित राष्ट्रीय जनजातीय संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर सख्त तेवर दिखाते हुए कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों, जातीय विद्वेष फैलाने वालों और धार्मिक आयोजनों के नाम पर अराजकता फैलाने वालों को खुली चेतावनी दी। उन्होंने दो टूक कहा– “जो बात से नहीं मानेंगे, उन्हें लाठी से समझाया जाएगा।”
मुख्यमंत्री ने जौनपुर की उस घटना का ज़िक्र किया जिसमें मोहर्रम के दौरान ताजिया को नियमों के खिलाफ ऊंचा उठाया गया, जिससे वह हाईटेंशन तार की चपेट में आ गया और तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इसके बाद हुए रास्ता जाम और विरोध को लेकर योगी ने सख्त लहजे में कहा–
> “जब पहले ही आगाह किया गया था, फिर भी जानबूझकर नियम तोड़े गए। अब ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस से कहा– लाठी मारकर बाहर करो, ये लातों के भूत हैं!”
“ताजिया ऊंचा, बिजली गुल, पेड़ कटे… पर दूसरों का क्या?”
सीएम योगी ने कहा कि किसी एक समुदाय के उत्सव के लिए अगर हाईटेंशन तार हटाना पड़े, बिजली सप्लाई रोकी जाए, या पेड़ों की टहनियां काटी जाएं तो यह उन सभी नागरिकों के साथ अन्याय है जो नियम का पालन कर रहे हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि नियम सबके लिए समान हैं और धार्मिक आस्था की आड़ में कानून तोड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
जातीय आग भड़काने वालों पर सीधा वार
सीएम ने बिना किसी नाम लिए उन लोगों को भी आड़े हाथों लिया जो सोशल मीडिया पर फेक अकाउंट बनाकर जातीय नफरत फैलाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि “तीन साल पहले आगजनी की घटना में केसरिया गमछा पहने एक व्यक्ति की असलियत सीसीटीवी में खुल गई थी। यह साफ हो गया कि वह हिंदू समाज को बदनाम करने की साजिश थी।”
योगी ने साफ कहा कि समाज की शांति भंग करने वाले छुपे हुए दुश्मनों को चिन्हित कर बाहर करना होगा।
कांवड़ यात्रा बनाम मोहर्रम: दोहरापन क्यों?
सीएम योगी ने यह सवाल भी उठाया कि मोहर्रम के जुलूसों में अस्त्र-शस्त्र और उपद्रव होते रहे हैं, लेकिन कोई कुछ नहीं बोलता। वहीं कांवड़ यात्रा जिसमें हर वर्ग के लोग बिना भेदभाव के भाग लेते हैं, उसे मीडिया में उपद्रव और आतंकवाद से जोड़ दिया जाता है।
> “यह वही मानसिकता है जो भारत की आस्था और सनातन परंपरा का अपमान करना चाहती है,” उन्होंने कहा।
बिरसा मुंडा को बताया प्रेरणा स्रोत
कार्यक्रम में सीएम योगी ने भगवान बिरसा मुंडा को याद करते हुए उन्हें राष्ट्रीय एकता और जनजातीय संघर्ष का प्रतीक बताया। कहा कि बिरसा मुंडा की विरासत आज भी हमें सिखाती है कि विद्वेष फैलाने वाली ताकतों से कैसे निपटना है।
> “जो समाज की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, वे आज बिरसा मुंडा की भावना के विरुद्ध काम कर रहे हैं।”
बहरहाल मुख्यमंत्री का यह भाषण साफ संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश सरकार सामाजिक सौहार्द के खिलाफ किसी भी तत्व के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगी। यह भाषण न केवल कानून व्यवस्था का संदेश है, बल्कि एक राजनीतिक चेतावनी भी।
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