प्रतापगढ़ /जन एक्सप्रेस। प्रतापगढ़ में पुलिस ने एंटी करप्शन ब्यूरो का फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को डराने-धमकाने और अवैध वसूली करने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी पहचान पत्र और सरकारी मोहर (सील) का इस्तेमाल कर खुद को एंटी करप्शन अधिकारी बताता था। पुलिस के मुताबिक, वह स्थानीय लोगों को अपने पद का रौब दिखाकर भ्रमित करता था और उनसे धन की वसूली करने का प्रयास करता था। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से फर्जी एंटी करप्शन ब्यूरो का आईडी कार्ड, फर्जी सील और एक एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, जिले में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर लोगों को ठगने और सरकारी अधिकारियों के नाम पर दबाव बनाने वाले लोगों के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत थाना कोतवाली नगर पुलिस को एक संदिग्ध व्यक्ति के बारे में सूचना मिली थी। सूचना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
गाजी चौराहे के पास खुद को बताया एंटी करप्शन अधिकारी
पुलिस के मुताबिक, थाना कोतवाली नगर की टीम क्षेत्र में गश्त कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि गाजी चौराहा के पास एक संदिग्ध व्यक्ति खुद को एंटी करप्शन ब्यूरो का अधिकारी बता रहा है। वह फर्जी आईडी कार्ड और सील दिखाकर आसपास के लोगों पर अपना प्रभाव बनाने की कोशिश कर रहा है। आरोप है कि वह इसी पहचान का इस्तेमाल कर लोगों से अवैध रूप से धन की मांग कर रहा था। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की। पुलिस को देखकर संदिग्ध के बीच अफरा-तफरी मच गई, लेकिन टीम ने उसे हिरासत में ले लिया। पूछताछ के दौरान उसकी पहचान धीरज कुमार पुत्र श्याम लाल के रूप में हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी प्रतापगढ़ जिले के आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के घरहिया गांव का निवासी है।
तलाशी में फर्जी आईडी और सील बरामद
पुलिस ने आरोपी की तलाशी ली तो उसके पास से एंटी करप्शन ब्यूरो का फर्जी पहचान पत्र बरामद हुआ। इसके अलावा एक फर्जी एंटी करप्शन ब्यूरो की सरकारी सील और एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी मिला। पुलिस अब बरामद किए गए दस्तावेजों और सील की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी ने इनका इस्तेमाल कितने समय से और किन लोगों के खिलाफ किया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर खुद को एंटी करप्शन अधिकारी बताकर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करता था। पुलिस का कहना है कि फर्जी अधिकारी की पहचान का इस्तेमाल केवल अवैध वसूली तक सीमित था या इसके जरिए किसी अन्य तरह की धोखाधड़ी भी की गई, इसकी जांच की जा रही है।
अधिकारियों पर दबाव बनाने का भी आरोप
पुलिस के मुताबिक, आरोपी आम लोगों को भ्रमित करने के साथ ही सरकारी अधिकारियों पर भी अपने कथित पद का दबाव बनाने का प्रयास करता था। फर्जी आईडी और सरकारी सील के जरिए वह खुद को प्रभावशाली अधिकारी के रूप में पेश करता था। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने किन-किन लोगों से संपर्क किया और क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी को भी उसके फर्जी परिचय के जरिए प्रभावित करने की कोशिश की गई। एसपी दीपक भूकर के निर्देशन में चलाए जा रहे अभियान के तहत इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया। एएसपी पूर्वी आलोक कुमार और सीओ नगर आशुतोष मिश्रा के पर्यवेक्षण में थाना कोतवाली नगर पुलिस टीम ने कार्रवाई की। थाना प्रभारी कोतवाली नगर सुभाष कुमार यादव के नेतृत्व में पुलिस टीम ने संदिग्ध को गिरफ्तार किया।
गिरोह से जुड़े लोगों की तलाश
आरोपी के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी एंटी करप्शन अधिकारी बनने के लिए उसे फर्जी आईडी कार्ड और सील कहां से मिली। साथ ही उसके मोबाइल फोन की भी जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। जांच के दौरान पुलिस आरोपी के संपर्क में रहने वाले लोगों और उसके द्वारा की गई कथित वसूली से जुड़े मामलों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस का कहना है कि यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।






