उत्तराखंडहरिद्वार

माता भगवती भोजनालय बना शताब्दी महोत्सव की सेवा-आत्मा का केंद्र

जन एक्सप्रेस/हरिद्वार।चंद्रप्रकाश बहुगुणा:राजा दक्ष की नगरी कनखल के समीप बैरागी द्वीप में बन रहे अस्थाई शताब्दी नगर में इन दिनों केवल तैयारियाँ ही नहीं चल रहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और मातृत्व भाव से ओतप्रोत एक जीवंत धारा प्रवाहित हो रही है। अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा की जन्म शताब्दी एवं अखंड दीप प्राकट्य शताब्दी महोत्सव के क्रम में माता भगवती भोजनालय का शुभारंभ इसी सेवा-भाव का सजीव उदाहरण बनकर सामने आया।भोजनालय की शुरुआत एक साधारण आयोजन नहीं, बल्कि मातृत्व से उपजी सेवा के आरंभ का साक्षी बना। जब प्रात:काल वैदिक मंत्रोच्चार से वातावरण गुंजायमान हो रहा था, वहीं दायीं ओर हिमालय सा पहाड में विराजित माता चण्डी देवी का आशीर्वाद हल्की हल्की हवा के साथ उपस्थित स्वयंसेवी तक पहुंच रहा था। तब सभी गायत्री परिवार के हजारों कार्यकर्ताओं के चेहरे में प्रसन्नता स्पष्ट रूप से झलक रही थी। इस बीच अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेया शैलदीदी ने विधिवत पूजन-अर्चन कर भोजनालय का शुरुआत किया। उस क्षण ऐसा प्रतीत हुआ मानो माता भगवती  के सेवा-संस्कार स्वयं इस आयोजन में साकार हो उठे हों। उपस्थित स्वयंसेवियों की आँखों में श्रद्धा और चेहरों पर सेवा का संतोष स्पष्ट झलक रहा था।इस अवसर पर देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या, महिला मण्डल की प्रमुख शैफाली पण्ड्या, व्यवस्थापक  योगेन्द्र गिरि सहित शंख निनादित करती पीतवस्त्रधारी बहनें तथा शांतिकुंज परिवार के अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी के मन में एक ही संकल्प था—इस विराट आयोजन में आने वाला कोई भी व्यक्ति खाली पेट न लौटे और थकान का अनुभव न करे। माता भगवती देवी भोजनालय में प्रतिदिन हजारों स्वयंसेवी, कार्यकर्ता एवं आगंतुक यहाँ सात्विक भोजन-प्रसाद ग्रहण करेंगे। सेवा की निरंतरता और बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए एक अतिरिक्त भोजनालय प्रारंभ करने की भी तैयारी की जा रही है। यहाँ आम जन से लेकर विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट अतिथियों के लिए भोजन प्रसाद तैयार होगा, ताकि सभी को अपनापन और सम्मान का अनुभव हो।उल्लेखनीय है कि 19 से 23 जनवरी 2026 तक आयोजित होने वाले इस शताब्दी महोत्सव में भारत सहित विश्व के 30 से अधिक देशों से स्वयंसेवी सहभागिता करेंगे। माता भगवती भोजनालय उनके लिए केवल भोजन का केंद्र नहीं, बल्कि ऊर्जा, अपनापन और सेवा-प्रेरणा का सशक्त आधार स्वरूप है।

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