मरम्मत के नाम पर नव-निर्माण, श्रद्धा के घाट पर भ्रष्टाचार की परतें! सिंचाई

जन एक्सप्रेस / चित्रकूट : मंदाकिनी के तट पर बना राजा घाट, जहां श्रद्धालु पुण्य की डुबकी लगाने आते हैं, अब पाप की पटकथा का केंद्र बनता जा रहा है। नगर पालिका परिषद चित्रकूट द्वारा घोषित 86 लाख रुपये के जीर्णोद्धार कार्य को मरम्मत का नाम देकर जिस तरह नव-निर्माण का खेल रचा गया, वह अब उजागर हो चुका है। सिंचाई विभाग की रिपोर्ट ने नगर पालिका के झूठे दावों की पोल खोल दी है।
पूरा मामला तब तूल पकड़ गया जब पूर्व सभासद सुशील श्रीवास्तव ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 7 मई को सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने जब स्थलीय निरीक्षण किया, तो वहां जेसीबी से खुदाई और अवैध निर्माण कार्य पकड़ा गया। जबकि नगर पालिका के पत्र में सिर्फ “मरम्मत और जीर्णोद्धार” का हवाला दिया गया था। लेकिन सच्चाई ये थी कि मूल जलस्रोत को बंद कर उसके ऊपर सीढ़ियाँ बना दी गईं, और नया निर्माण कार्य जोरों पर था — वो भी बिना किसी वैधानिक अनुमति के।
फ्लड प्लेन ज़ोन में नियमों की धज्जियाँ, NGT की गाइडलाइन को भी किया नजरअंदाज़
फ्लड प्लेन ज़ोन में बिना अनुमति निर्माण पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके लिए एनजीटी और सिंचाई विभाग दोनों की मंजूरी अनिवार्य है। बावजूद इसके, नगर पालिका ने न तो कोई स्वीकृति ली और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लिया। विभागीय दस्तावेजों में यह स्पष्ट लिखा गया है कि नगर पालिका का दावा गुमराह करने वाला है।
जनता पूछ रही है: 86 लाख में बना क्या, और बंटा किसमें?
अब आमजनता के बीच ये सवाल गूंज रहा है — क्या कुछ सीढ़ियों और दीवारों के नाम पर 86 लाख का बंदरबांट हुआ? और अगर हां, तो इसके पीछे कौन-कौन शामिल है? इस पूरे मामले ने प्रशासन की पारदर्शिता, नगर पालिका की नीयत और जनता की आस्था तीनों को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
अब निगाहें शासन-प्रशासन पर हैं — क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर घोटाले के दलदल में यह मामला भी गुम हो जाएगा?







