उत्तर प्रदेशमहराजगंजराज्य खबरें

महराजगंज : वंचितों को मिला हक़, पूर्व सांसद प्रतिनिधि काशीनाथ सिंह की पहल से दो महिलाओं को मिला भूमि का पट्टा व कब्जा

जन एक्सप्रेस/महराजगंज: जनपद के पनियरा विधानसभा क्षेत्र में हिन्दू युवा वाहिनी के पूर्व सांसद प्रतिनिधि काशीनाथ सिंह ने समाज के वंचित और वंचित तबके के लोगों को उनका अधिकार दिलाकर इंसानियत और जनसेवा की मिसाल पेश की है। उनकी अथक कोशिशों से दो गरीब महिलाओं को आखिरकार वर्षों से लंबित सरकारी जमीन का पट्टा और कब्जा दोनों मिल गया।
पहला मामला भिटौली थाना क्षेत्र के छपिया ग्राम पंचायत का है, जहां की मुस्लिम दिव्यांग युवती साजरा खातून पुत्री मोहम्मद शकील कई वर्षों से सरकारी जमीन के हक की लड़ाई लड़ रही थीं। काशीनाथ सिंह की लगातार पैरवी और जनसेवा के संकल्प के चलते राजस्व विभाग ने आखिरकार साजरा को दो डिसमिल भूमि का पट्टा स्वीकृत कर दिया। प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर उनकी उपस्थिति में भूमि का कागजात और कब्जा दोनों सौंपा। जमीन पाकर साजरा की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े, मानो वर्षों का सपना साकार हो गया हो।
दूसरा मामला ग्राम बलुआ निवासी श्रीमती श्रीपति देवी पत्नी लालजी कनौजिया का है, जिन्हें वर्ष 1998 में सरकारी पट्टा आवंटित तो हुआ था, लेकिन आज तक न तो दस्तावेज़ मिले और न ही कब्जा। जब यह मामला काशीनाथ सिंह के संज्ञान में आया, तो उन्होंने तुरंत जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा से मुलाकात की और इस अन्याय को दूर करने की मांग उठाई।
उनकी पहल पर तहसीलदार सदर पंकज कुमार शाही, नायब तहसीलदार विवेकानंद श्रीवास्तव, कानूनगो अनिल कुमार मिश्रा, और थानाध्यक्ष भिटौली मदन मोहन मिश्रा सहित पूरी राजस्व टीम मौके पर पहुंची और श्रीपति देवी को भूमि का वैधानिक कब्जा दिलाया।
इस दौरान ग्रामीणों ने काशीनाथ सिंह का जोरदार स्वागत किया और कहा कि आज भी ऐसे जनसेवक हैं जो बिना भेदभाव गरीबों और वंचितों की आवाज़ बनते हैं।
काशीनाथ सिंह ने कहा गरीबों और वंचितों को उनका अधिकार दिलाना ही मेरी असली राजनीति और सच्ची सेवा है। पद या प्रतिष्ठा से बड़ी चीज़ है इंसान की पीड़ा को समझना। जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति भी अपने हक से वंचित रहेगा, तब तक मेरा संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आगे कहा सरकार की योजनाएं तभी सार्थक होंगी जब उनका लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे। मेरा संकल्प है कि क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति बिना छत, बिना जमीन या बिना अधिकार के न रहे। यह लड़ाई केवल कागज़ों की नहीं, बल्कि इंसाफ और इंसानियत की है। जब किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कान आती है, तो वही मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button