:जौनपुर

कफ सिरप तस्करी कांड में जौनपुर के पूर्व सपा विधायक का नाम भी जुड़ा

फर्जी दवा कंपनियों के खातों में मिला संदिग्ध लेन-देन, ईडी जल्द भेजेगी नोटिस

जन एक्सप्रेस लखनऊ/वाराणसी।

कफ सिरप की तस्करी के बहुचर्चित मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए नाम और नई कड़ियां लगातार सामने आ रही हैं। ताजा जानकारी के अनुसार, जौनपुर जिले के पूर्व सपा विधायक और का नाम भी जांच के दायरे में आया है। एक समाचार पत्र एवं चैनलों में समाचार चलने के बाद जिले में हड़कंप मच गया प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोली गई दवा कंपनियों में इनसे जुड़े संदिग्ध लेन-देन के साक्ष्य मिले हैं। इसी आधार पर एजेंसी ने इनकी भूमिका की गहन जांच शुरू कर दी है और जल्द ही पूछताछ के लिए नोटिस भेजने की तैयारी में है।
ईडी सूत्रों के मुताबिक, कफ सिरप की तस्करी में गिरफ्तार और बर्खास्त सिपाही आलोक सिंह, अमित टाटा और शुभम जायसवाल से जुड़ी दवा कंपनियों की जांच के दौरान यह नया खुलासा हुआ है। एजेंसी को बैंक खातों के ट्रांजेक्शन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और दस्तावेजों की पड़ताल में पूर्व विधायक से जुड़े बड़े वित्तीय लेन-देन का पता चला है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रकम किस उद्देश्य से दी या ली गई थी और सप्लाई चेन में इनकी भूमिका क्या रही।

फर्जी मेडिकल फर्मों का जाल, करोड़ों का लेन-देन

सूत्र बताते हैं कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कई मेडिकल फर्म खोली गईं, जिनके जरिए कोडीन युक्त कफ सिरप की बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त का संदेह है। वाराणसी की सप्तसागर मंडी में दिनेश कुमार यादव और शुभम जायसवाल की दुकानें आमने-सामने हैं। यहीं से नेटवर्क के विस्तार की शुरुआत हुई। दिनेश और उसका भतीजा आशीष यादव, स्वप्निल केशरी को “बड़ा मुनाफा” दिलाने का झांसा देकर कई बार शुभम से मिलवाते रहे। शुभम ने मेडिकल फर्म खोलने की पूरी प्रक्रिया बताई और इसके बाद चंदौली में तीन मेडिकल फर्म खोल दी गईं।
जांच एजेंसी को संदेह है कि इन्हीं फर्मों के जरिए कमीशन के बदले भारी भरकम रकम निवेश की गई। अब ईडी यह पता लगा रही है कि इसी निवेश से जुड़े लेन-देन में पूर्व विधायक की क्या भूमिका रही।
पूर्व विधायक के ठिकानों पर पड़ताल, संपत्तियों का ब्योरा खंगाला गया
ईडी ने जौनपुर और आस-पास के जिलों में भी व्यापक स्तर पर जांच कराई है। बीते एक वर्ष में पूर्व विधायक की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों और लेन-देन का पूरा विवरण जुटाया जा रहा है। साथ ही यह भी खंगाला जा रहा है कि उनका संपर्क पूर्वांचल के किन प्रभावशाली नेताओं और बाहुबलियों से रहा है। एजेंसी का कहना है कि सभी साक्ष्य जुटाने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।

नोटिस पर नहीं पहुंचे तीन फर्म संचालक

कफ सिरप प्रकरण से जुड़े तीन दवा फर्म संचालकों को ईडी ने कुछ दिन पूर्व नोटिस जारी किया था, लेकिन तय समय पर वे ईडी कार्यालय नहीं पहुंचे। एजेंसी अब उन्हें दोबारा नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाएगी। इसके साथ ही आलोक सिंह और अमित टाटा से भी पूर्व विधायक की भूमिका को लेकर आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की तैयारी है।
फिलहाल पूरा मामला संवेदनशील माना जा रहा है। ईडी का कहना है कि जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर ही सामने लाए जाएंगे। एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर व समाचार चैनलों एवं शोसल मिडिया में समाचार चलने के बाद सपा के पूर्व मंत्री पूर्व विधायक शैलेंद्र यादव उर्फ ललई ने पत्रकारों से बातचीत कर कहा कि उक्त मामले की जांच हो और जो भी चाहे जिस पार्टी अथवा जाति धर्म का हो उस पर कार्रवाई हो रही मैं शाहगंज का विधायक रहा हूं और मेरा और मेरे परिवार का कोई लेना-देना नहीं है और न हीं किसी ऐसे व्यक्ति से मेरा संबंध ही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button