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जौनपुर गांजा कांड में नया मोड़: मां की तहरीर बदली या दबाई गई?

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: जौनपुर के चर्चित गांजा कांड में एक नया और गंभीर मोड़ सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोपी अखिलेश सिंह की मां द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना पत्र और दर्ज मुकदमे के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी की मां फूलादेवी ने अपने मूल प्रार्थना पत्र में गांव के तीन लोगों के साथ-साथ सरपतहा थाने के कुछ पुलिसकर्मियों पर भी साजिश रचने का आरोप लगाया था। हालांकि, जब मुकदमा दर्ज किया गया तो उसमें केवल गांव के तीन लोगों के नाम शामिल किए गए, जबकि पुलिसकर्मियों के नाम पूरी तरह हटा दिए गए।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या मां की मूल तहरीर को नजरअंदाज किया गया या फिर किसी दबाव में उसे बदलवाया गया? यदि साजिश में ग्रामीण शामिल थे, तो क्या कार्रवाई करने वाली पुलिस पूरी तरह निर्दोष थी, या फिर मामले में मिलीभगत की भी आशंका है?
गौरतलब है कि सरपतहा पुलिस ने पहले अखिलेश सिंह को 4 किलो 11 ग्राम गांजा के साथ गिरफ्तार किया था। लेकिन अदालत ने गिरफ्तारी को संदिग्ध और अवैध मानते हुए आरोपी को जमानत दे दी। साथ ही न्यायालय ने पुलिस अधीक्षक को 15 दिन के भीतर पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
इस बीच, आरोपी की मां ने यह भी आरोप लगाया है कि उनके बेटे को गांव में कथित गांजा कारोबार का वीडियो वायरल करने के कारण फर्जी मामले में फंसाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि रिहाई के बाद उनके बेटे को जान से मारने की धमकी दी गई, जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है।
इधर, सरपतहा क्षेत्र में लगातार गांजा तस्करी के वीडियो वायरल होने से स्थानीय पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई करने के बजाय आंखें मूंदे बैठी है।
फिलहाल, पूरे मामले की जांच एसपी सिटी को सौंपी गई है। अब देखने वाली बात यह होगी कि जांच निष्पक्ष होती है या नहीं और क्या इस मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी, या फिर यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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