
जन एक्सप्रेस/हरिद्वार: देवभूमि उत्तराखण्ड स्थित शांतिकुंज के युवा प्रतिनिधि एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या को कनाडा के प्रमुख प्रांत ओंटारियो की संसद द्वारा विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें समाजोपयोगी योगदान, मानवीय सेवा कार्यों और प्रेरणादायी नेतृत्व के लिए प्रदान किया गया।
डॉ. चिन्मय पण्ड्या इन दिनों अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के जन्मशताब्दी वर्ष के संदेश के वैश्विक प्रसार हेतु विदेश प्रवास पर हैं। कनाडा प्रवास के दौरान उन्होंने विभिन्न शहरों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेकर भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों और मानवीय चेतना का संदेश दिया।
ओंटारियो संसद में आयोजित सम्मान समारोह में सरकार के प्रतिनिधि सांसद शरेफ सबावे ने डॉ. पण्ड्या के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनका समाज के प्रति समर्पण, उत्कृष्ट नेतृत्व और सेवा भावना प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि डॉ. पण्ड्या के प्रयासों ने हजारों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है।
कनाडा प्रवास के दौरान डॉ. पण्ड्या ने बीएपीएस स्वामीनारायण कनाडा के अध्यक्ष गुणसागरदास स्वामी से भी मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने जन्मशताब्दी वर्ष, शांतिकुंज तथा देव संस्कृति विश्वविद्यालय की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। साथ ही विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न और साहित्य भी भेंट किया।
गुणसागरदास स्वामी ने गायत्री परिवार को जन्मशताब्दी वर्ष की शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रचार-प्रसार में डॉ. पण्ड्या के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि विश्वभर में भारतीय संस्कृति के संदेश को पहुंचाने के लिए ऐसे प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
इसके अलावा मिस्सीसागा स्थित मिस्सीसागा वैली कम्युनिटी सेंटर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने ओंटारियो राज्य की गायत्री परिवार शाखाओं—टोरंटो, वेस्टर्न ओंटारियो एवं कनाडा दिया—के कार्यकर्ताओं और युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने “जन्मशताब्दी वर्ष और हमारी भूमिका” विषय पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं और परिजनों ने संगठनात्मक, वैचारिक एवं आध्यात्मिक विषयों से जुड़ी अपनी जिज्ञासाएं रखीं, जिनका समाधान डॉ. पण्ड्या ने विस्तार से किया। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
कनाडा में आयोजित इन कार्यक्रमों ने न केवल भारतीय मूल के लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य किया, बल्कि स्थानीय नागरिकों के बीच भी भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विचारधारा के प्रति सकारात्मक जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।






