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जौनपुर की सड़कों पर कब्ज़े का कारोबार, जाम की चपेट में शहर

जन एक्सप्रेस/जौनपुर: जौनपुर शहर में सड़कें अब आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि अव्यवस्थित व्यापार और बेतरतीब पार्किंग का अड्डा बनती जा रही हैं। शहर के लगभग सभी प्रमुख शहरी बाजारों में अतिक्रमण और पार्किंग की समस्या ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है।

हर चौराहा, हर बाज़ार जाम की गिरफ्त में

जेसीज चौराहा से ओलंदगंज तक, कसेरी बाजार से कोतवाली होते हुए सब्ज़ी मंडी तक, सद्भावना पुल, चहारसू चौराहा और बदलापुर पड़ाव—शहर का शायद ही कोई ऐसा इलाका बचा हो जहां जाम आम बात न बन गई हो। सड़कों का बड़ा हिस्सा दुकानों, ठेलों, स्टॉल और वाहनों के कब्जे में है।

छोटे–बड़े व्यापारी, सब बराबर के जिम्मेदार

जहां छोटे व्यापारी मजबूरी में सड़क किनारे ठेला लगाकर रोज़ी-रोटी कमा रहे हैं, वहीं बड़े व्यापारी भी इस अव्यवस्था को बढ़ाने में पीछे नहीं हैं। दुकानों के बाहर लगे बड़े-बड़े विज्ञापन बोर्ड सड़क का हिस्सा घेर लेते हैं और ग्राहक अपनी गाड़ियां ठीक दुकान के सामने खड़ी कर देते हैं। नतीजतन सड़क सिकुड़ती जाती है और जाम बढ़ता जाता है।

आपात सेवाओं के लिए भी नहीं बचता रास्ता

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपात सेवाओं के लिए रास्ता निकालना मुश्किल हो जाता है। कई बार तो ऐसा प्रतीत होता है मानो सरकारी सड़कों की “रजिस्ट्री” ही निजी हाथों में चली गई हो। सर्दियों में किसी तरह यह जाम सह लिया जाता है, लेकिन गर्मियों में यही अव्यवस्था लोगों के लिए आफत बन जाती है।

हादसों का खतरा बना रहता है

इस अव्यवस्था के चलते आए दिन घटनाएं सामने आती रहती हैं। कभी किसी दुकान पर वाहन चढ़ जाता है, तो कभी राह चलते आम लोग चोटिल हो जाते हैं। सवाल यह उठता है कि ऐसी घटनाओं की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?

जिम्मेदारी से बचते विभाग

नगर पालिका परिषद, जिला प्रशासन, संबंधित विभाग और यातायात पुलिस—सब कहीं न कहीं अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आते हैं। सबसे ज्यादा दबाव ट्रैफिक पुलिस पर होता है, जो सीमित संसाधनों और जनशक्ति के सहारे हालात संभालने की कोशिश करती रहती है।


सिर्फ कार्रवाई नहीं, ठोस समाधान जरूरी

अब समय आ गया है कि इस समस्या का स्थायी और व्यावहारिक समाधान निकाला जाए।

  • शहर में वेंडिंग ज़ोन और नो-वेंडिंग ज़ोन का स्पष्ट निर्धारण किया जाए।

  • छोटे व्यापारियों को सम्मानपूर्वक व्यापार करने का स्थान मिले।

  • पार्किंग के लिए चिन्हित स्थल तय किए जाएं।

  • सड़क पर अतिक्रमण के खिलाफ बिना भेदभाव कार्रवाई हो।


शहर का व्यापार और शहर की व्यवस्था एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि संतुलन नहीं बनाया गया, तो नुकसान व्यापारी, प्रशासन और आम नागरिक—तीनों का होगा।

जनहित में यह अपेक्षा की जाती है कि जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चन्द्र सिंह इस गंभीर सामाजिक समस्या पर एक ठोस, स्थायी और प्रभावी कार्ययोजना बनाकर अमल में लाएंगे, ताकि जौनपुर का व्यापार भी चलता रहे और शहर की रफ्तार भी बनी रहे।

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