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उत्तराखंड में स्कूल विलय का विरोध तेज, ग्रामीण व छात्र संगठन सड़कों पर

जन एक्सप्रेस/हल्द्वानी/भवाली/पिथौरागढ़ : उत्तराखंड सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों को मर्ज कर क्लस्टर मोड में संचालित करने की योजना का विरोध प्रदेशभर में तेज़ होता जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शुरू की गई इस योजना के खिलाफ कुमाऊं के कई जिलों में छात्र संगठन, अभिभावक और स्थानीय लोग सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

हल्द्वानी में मंगलवार को परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछासं) ने एसडीएम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद करने की बजाय सरकार उन्हें बेहतर संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा के अधिकार और सामाजिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रही है।

भवाली में अभिभावकों का विरोध उग्र होता नजर आया। राजकीय इंटर कॉलेज भूमियाधार के पीटीए अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद आर्या के नेतृत्व में हुई बैठक में कहा गया कि 12 किमी दूर जीआईसी नैनीताल क्लस्टर में स्कूल शामिल करने की योजना को किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। अभिभावकों ने स्पष्ट किया कि वे अपने बच्चों को इतनी दूर नहीं भेज सकते।

पर्वतीय जिलों में गूंजा विरोध का स्वर
पिथौरागढ़ के कनालीछीना, बेरीनाग, गंगोलीहाट, डीडीहाट और अल्मोड़ा के भैसियाछाना, धौलादेवी, चौखुटिया, सोमेश्वर जैसे क्षेत्रों में भी ग्रामीणों ने स्कूल विलय योजना का विरोध किया है। चंपावत जिले के पाटी व बाराकोट ब्लॉकों में भी स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किए हैं।

प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इससे पहाड़ी और दूरदराज़ के क्षेत्रों में स्कूलों की दूरी बढ़ेगी, जिससे गरीब और वंचित वर्ग के बच्चे, खासकर लड़कियां, शिक्षा से वंचित रह जाएंगी। इसके अलावा, भोजनमाताओं, सहायक स्टाफ और शिक्षकों के रोजगार पर भी असर पड़ेगा। लोगों की मांग है कि राज्य सरकार सबके लिए निशुल्क, समान और वैज्ञानिक शिक्षा सुनिश्चित करे और बिना स्थानीय सहमति के कोई स्कूल बंद न किया जाए।

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