वी-बी-जी-राम-जी योजना देश में लागू, 125 दिन रोजगार की गारंटी
ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन की दिशा में ऐतिहासिक पहल: केशव प्रसाद मौर्य

जन एक्सप्रेस/ लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय ग्राम्य विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में देश में ‘वी-बी-जी-राम-जी योजना’ लागू की गई है। उन्होंने इसे ग्रामीण भारत के सर्वांगीण विकास और रोजगार सृजन की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया।
उन्होंने कहा कि योजना के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को प्रति वर्ष 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार मिलेगा। इससे ग्रामीण मजदूरों की आय बढ़ेगी और पलायन पर रोक लगेगी। मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर किया जाएगा, देरी होने पर श्रमिकों को मुआवजा और ब्याज भी मिलेगा।
मौर्य ने बताया कि योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के विकास, स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण और विभिन्न योजनाओं के बेहतर समन्वय पर जोर दिया जाएगा। ग्राम पंचायतों को योजना में प्रमुख भूमिका दी गई है, जहां पंजीकरण, जॉब कार्ड जारी करने से लेकर कार्य आवंटन और क्रियान्वयन तक की जिम्मेदारी होगी। कम से कम 50 प्रतिशत कार्य ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि योजना के तहत प्रत्येक परिवार को यूनिक रोजगार कार्ड जारी होगा, जिसमें सभी कार्यों, भुगतान, मस्टर रोल और लाभ का पूरा विवरण दर्ज रहेगा। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। रोजगार न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता भी दिया जाएगा।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, जीपीएस निगरानी, ऑनलाइन एमआईएस, जियो टैगिंग और डिजिटल मस्टर रोल जैसी व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी। जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, कृषि आधारित कार्य और आजीविका से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि योजना में कम से कम एक-तिहाई लाभार्थी महिलाएं होंगी। दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक और अन्य कमजोर वर्गों को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
मौर्य ने कहा कि इस योजना से गांव आत्मनिर्भर बनेंगे, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यह योजना विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगी।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों में मनरेगा जैसी योजनाएं भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भेंट चढ़ गई थीं, जिससे गरीब मजदूरों को उनका पूरा हक नहीं मिल पाता था।






