
जिला संवाददाता – सचिन नौटियाल
जन एक्सप्रेस / पुरोला: प्रखंड पुरोला के कुमोला-पूजेली थान सहित शिकारू नाग महाराज के दणमाणा और चंदेली में आयोजित जागड़ा पर्व में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। राजा रघुनाथ, मटिया महासू और शिकारू नाग महाराज के जागरों में क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। धार्मिक आयोजन के दौरान मंदिर परिसरों में रातभर आस्था और भक्ति का माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने देवताओं के दर्शन कर क्षेत्र की खुशहाली और परिवारों की सुख-समृद्धि की कामना की।
राजा रघुनाथ और महासू देवता के जयकारों से गूंजा परिसर
जागड़ा पर्व को लेकर कुमोला-पूजेली थान में विशेष धार्मिक आयोजन किए गए। जैसे-जैसे रात बढ़ती गई, मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती रही। जागरों के दौरान श्रद्धालु देवताओं के जयकारे लगाते हुए भक्ति में लीन नजर आए।
राजा रघुनाथ, मटिया महासू और शिकारू नाग महाराज के प्रति लोगों की गहरी आस्था देखने को मिली। दूर-दराज के गांवों से भी बड़ी संख्या में ग्रामीण धार्मिक आयोजन में शामिल होने पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर अपने परिवार और क्षेत्र के लिए सुख, शांति एवं समृद्धि की प्रार्थना की।
रातभर चला जागरण और धार्मिक आयोजन
जागड़ा पर्व के अवसर पर मंदिर परिसर में रातभर विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं। श्रद्धालुओं ने जागरण में हिस्सा लिया और देवताओं के जयकारों के बीच भक्ति में लीन रहे।
आयोजन को लेकर मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। श्रद्धालुओं के लिए भोजन और भंडारे की व्यवस्था भी की गई। दूर-दराज के गांवों से पहुंचे लोगों ने रातभर धार्मिक आयोजन में भाग लिया और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व को मनाया।
देव संस्कृति और लोक आस्था की दिखी झलक
जागड़ा पर्व के आयोजन ने उत्तराखंड की पारंपरिक देव संस्कृति और लोक आस्था की जीवंत झलक प्रस्तुत की। धार्मिक आयोजन में क्षेत्र के सयाणे, बजीर, पुजारी और हजारों स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों के लिए इस तरह के धार्मिक आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से क्षेत्र की पारंपरिक संस्कृति और सामाजिक एकजुटता भी मजबूत होती है। जागड़ा पर्व में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने स्थानीय लोगों की देव परंपराओं के प्रति आस्था को भी प्रदर्शित किया।
कुमोला-पूजेली थान, दणमाणा और चंदेली में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के दौरान पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल रहा। देर रात तक मंदिर परिसरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और देवताओं के जयकारे गूंजते रहे।




