
जन एक्सप्रेस, देहरादून: उत्तरकाशी जिले के धराली क्षेत्र में आई भयावह प्राकृतिक आपदा के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए अब नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) ने पहल की है। NDMA यातायात बहाल होते ही देश के प्रमुख वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों का दल क्षेत्र में भेजेगा, जो तबाही के स्रोत की वैज्ञानिक जांच करेगा।
ग्लेशियर टूटने, बादल फटने या झील के दरकने जैसे संभावित कारणों की जांच इस अध्ययन का हिस्सा होगी। इधर, उत्तराखंड राज्य सरकार भी अपनी ओर से अध्ययन दल भेजने की तैयारी कर रही है, जिसमें उत्तराखंड भूस्खलन प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र, यूएसडीएमए व अन्य तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हो सकते हैं।
धराली कस्बे में खीरगंगा नदी के रास्ते आई बाढ़ और उसके साथ आया 15 फीट ऊंचा मलबा, लोगों के घर और खेत बहा ले गया। भयावह मंजर के बाद स्थानीय लोग दहशत में हैं और तबाही का कारण एक रहस्य बना हुआ है।
मौसम विभाग का कहना है कि आपदा के दौरान क्षेत्र में केवल हल्की से मध्यम वर्षा रिकॉर्ड हुई थी, जिससे बादल फटने की आशंका कम है। वहीं, कुछ विशेषज्ञ मान रहे हैं कि श्रीकंठ पर्वत से कोई ग्लेशियर टूटकर झील में गिरा, जिससे झील का बांध टूटा और नीचे तबाही मच गई।
एक अन्य संभावना यह भी जताई जा रही है कि लगातार तीन दिन की बारिश से ऊपरी बुग्याल क्षेत्र में पानी भर गया, जो बाद में टूटकर खीरगंगा के रास्ते धराली तक तबाही बनकर बह गया।
हालांकि, फिलहाल कोई ठोस पुष्टि नहीं हुई है, और सभी दावे परिकल्पनाओं पर आधारित हैं। इसी स्थिति को स्पष्ट करने के लिए NDMA ने जोशीमठ मॉडल को अपनाते हुए विशेषज्ञों का दल भेजने का निर्णय लिया है। यह दल घटनास्थल पर जाकर वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट NDMA को सौंपेगा।






