उत्तराखंडहरिद्वार

शांतिकुंज में जड़ी-बूटियों का हवन अध्यात्म, स्वास्थ्य और ज्ञान का अद्भुत संगम

देवसंस्कृति विवि में हवन से साधकों का तन-मन स्वस्थ करने हेतु विशेष शोध जारी

जन एक्सप्रेस हरिद्वार। शांतिकुंज के देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में जड़ी-बूटियों के माध्यम से हवन के द्वारा रोगोपचार किया जा रहा है। इसके अंतर्गत हवन में विशेष जड़ी बूटियों द्वारा तैयार की गयी हवन सामग्री का उपयोग किया जाता है ।  गायत्री महामंत्र की आहुतियाँ दी गईं और इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आध्यात्मिक अनुभव के रूप में आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या के मार्गदर्शन में डॉ. वंदना श्रीवास्तव की टीम इस कार्यक्रम को संचालित कर रही है।हवन का उद्देश्य न केवल धार्मिक परंपरा को बनाए रखना है, बल्कि साधकों के तन और मन को स्वस्थ और शुद्ध करना भी है। युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने सदैव कहा है कि यज्ञ पिता और गायत्री माता हैं। इनके सानिध्य और सामीप्य से साधक का तन स्वस्थ और मन शुद्ध होता है। इस हवन में प्रयोग की गई जड़ी-बूटियों से निकलने वाला औषधीय धुआँ स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे मानसिक तनाव कम होता है, ध्यान की शक्ति बढ़ती है और योगाभ्यास का अनुभव गहरा होता है।विभागाध्यक्ष डॉ. वंदना श्रीवास्तव ने बताया कि हमारे इस शोध कार्यक्रम का उद्देश्य है कि परंपरागत यज्ञ और आधुनिक विज्ञान के बीच संतुलन स्थापित किया जा सके। हवन के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ के साथ ही शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी यह लाभकारी है। कई रोगों में अत्यंत लाभदायक है। अलग अलग बीमारियों के लिए अलग अलग हवन सामग्री भी तैयार की गयी है, जिसे प्राप्त करने हेतु देसंविवि के आयुर्वेद विभाग से संपर्क किया जा सकता है। हवन में शामिल साधकों और छात्रों ने बताया कि जड़ी-बूटियों का हवन वातावरण को शुद्ध करता है और मानसिक शांति का अनुभव कराता है। हवन के दौरान एक विशेष ऊर्जा का संचार हुआ और तन-मन को बहुत लाभ मिला। देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का यह प्रयास न केवल आध्यात्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आधुनिक समाज में योग, ध्यान और प्राकृतिक चिकित्सा के महत्व को भी उजागर करता है। ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी के लिए ज्ञान, स्वास्थ्य और आध्यात्म के अद्भुत संगम का अनुभव प्रदान करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button