गंगा घाटी में 100 किमी इको-सेंसिटिव ज़ोन है प्रकृति संरक्षण की मजबूत पहल।

जन एक्सप्रेस/उत्तरकाशी: गंगा की जीवनदायिनी धारा के संरक्षण को ध्यान में रखते हुए भागीरथी घाटी में लगभग 100 किलोमीटर के दायरे को पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र जो इको-सेंसिटिव ज़ोन के रूप में संरक्षित किया गया है। गोमुख से उत्तरकाशी तक फैला यह क्षेत्र गंगा की मूलधारा का संवेदनशील भाग है, जहाँ प्रकृति और मानव जीवन का गहरा संबंध देखने को मिलता है।-गंगोत्री इको सेंसिटिव जोन भागीरथी नदी के तटों की रक्षा के लिए 18 दिसंबर 2012 को अधिसूचित 100 किमी से अधिक का क्षेत्र है। गौमुख से उत्तरकाशी तक फैले इस जोन में 88 गाँव आते हैं। इसका उद्देश्य अनियंत्रित विकास, संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना है इस क्षेत्र में इको सेंसिटिव ज़ोन का उद्देश्य विकास को रोकना नहीं, बल्कि उसे नियंत्रित और प्रकृति के अनुकूल बनाना है। बड़े बांध, खनन और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर नियंत्रण रखते हुए, जैविक खेती, जल संरक्षण, स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका और इको-टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंगा घाटी का यह 100 किलोमीटर का क्षेत्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि एक पारिस्थितिकीय सुरक्षा कवच है, जो हिमालयी पारिस्थितिकी, जल स्रोतों और जैव विविधता की रक्षा करता है।
विज्ञान संचारक एवं पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल कहते हैं कि गंगा घाटी में लगभग 100 किलोमीटर का इको-सेंसिटिव ज़ोन केवल एक सीमा निर्धारण नहीं, बल्कि गंगा के अस्तित्व को सुरक्षित रखने का वैज्ञानिक प्रयास है। यह क्षेत्र हिमालय की संवेदनशीलता को समझते हुए बनाया गया एक सुरक्षा घेरा है।उन्होंने आगे कहा, कि यदि हम गंगा की ऊपरी धारा को सुरक्षित रखते हैं, तो पूरी नदी का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है। इसलिए यह ज़ोन केवल उत्तराखंड के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के जल भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।
स्थानीय समुदायों के लिए भी यह पहल नए अवसर लेकर आई है। पर्यावरण के अनुकूल रोजगार जैसे होमस्टे, प्रकृति पर्यटन, औषधीय पौधों का संरक्षण और जैविक खेती के जरिए आर्थिक विकास और संरक्षण दोनों को साथ लेकर चलने का रास्ता खुल रहा है। कुल मिलाकर, गंगा घाटी में 100 किलोमीटर का यह इको-सेंसिटिव ज़ोन एक ऐसी दूरदर्शी सोच को दर्शाता है, जहाँ प्रकृति की रक्षा ही विकास की असली नींव मानी जाती है।






