जौनपुर में भगवान परशुराम की 11 फीट प्रतिमा का भव्य अनावरण, 19 अप्रैल को बनेगा ऐतिहासिक दिन
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर जौनपुर के कुल्हनामऊ चौराहे पर भगवान परशुराम की 11 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा।

जन एक्सप्रेस/जौनपुर
जौनपुर जनपद एक ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, जहां 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर भगवान परशुराम की 11 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक होगा, बल्कि जौनपुर के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला माना जा रहा है।
यह भव्य आयोजन जौनपुर के कुल्हनामऊ चौराहे पर आयोजित किया जाएगा, जहां इस विशाल प्रतिमा को विशेष रूप से स्थापित किया गया है। कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं और आयोजकों द्वारा इसे ऐतिहासिक बनाने की पूरी कोशिश की जा रही है। स्थानीय लोगों में इस कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
मान्यता के अनुसार, जौनपुर का प्राचीन नाम “जमदग्निपुरम” रहा है, जो महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका से जुड़ा हुआ है। ये दोनों भगवान परशुराम के माता-पिता माने जाते हैं। यही कारण है कि इस क्षेत्र का भगवान परशुराम से विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक संबंध माना जाता है। इसी पौराणिक महत्व को ध्यान में रखते हुए इस भव्य प्रतिमा की स्थापना की गई है, जिससे नई पीढ़ी को अपनी विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इस प्रतिमा की स्थापना के पीछे बदलापुर के विधायक रमेश चंद्र मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके प्रयासों और दूरदर्शिता के चलते यह परियोजना साकार हो सकी है। वहीं, सुजानगंज क्षेत्र के निवासी प्रमोद पाठक और उनके परिवार ने भी इस कार्य में अहम योगदान दिया है। उनके सहयोग से यह भव्य प्रतिमा तैयार हो पाई है, जो अब क्षेत्र की पहचान बनने जा रही है।
प्रतिमा को जयपुर के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार किया गया है। इसे बनाने में लगभग एक वर्ष का समय लगा है। कारीगरों ने बारीकी और पारंपरिक कला का विशेष ध्यान रखते हुए इसे एक भव्य और आकर्षक रूप दिया है। करीब 11 फीट ऊंची इस प्रतिमा के साथ पूरी संरचना की ऊंचाई 20 फीट से अधिक बताई जा रही है, जो इसे और भी भव्य बनाती है।
प्रतिमा स्थल को भी आकर्षक तरीके से विकसित किया गया है। यहां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रेलिंग, सीढ़ियां और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि लोग आसानी से दर्शन कर सकें। इसके साथ ही सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं।
19 अप्रैल को होने वाले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आयोजकों ने सभी समाज के लोगों से इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने की अपील की है। यह आयोजन सामाजिक समरसता और धार्मिक एकता का भी संदेश देगा।
कुल मिलाकर, भगवान परशुराम की यह भव्य प्रतिमा न केवल श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बनेगी, बल्कि जौनपुर की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करेगी। आने वाले समय में यह स्थल धार्मिक पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा।






