अनोरा कला में अवैध रो-हाउसिंग निर्माण को लेकर उठे सवाल, एलडीए अधिकारियों की भूमिका पर जांच की मांग

जन एक्सप्रेस/ लखनऊ: राजधानी लखनऊ के ग्राम अनोरा कला क्षेत्र में कथित अवैध रो-हाउसिंग निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के प्रवर्तन जोन-5 क्षेत्र में बिना स्वीकृत ले-आउट के कई रो-हाउसिंग परियोजनाओं का विकास किया गया है। मामले को लेकर अब संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से निर्माण गतिविधियां संचालित हो रही थीं, लेकिन इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कृषि भूमि पर नियमानुसार अनुमति प्राप्त किए बिना निर्माण कार्य किए गए हैं, जिससे भूमि उपयोग संबंधी नियमों के उल्लंघन की आशंका व्यक्त की जा रही है।
मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है और स्थानीय नागरिक प्रशासन से स्पष्ट कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी परियोजना का ले-आउट स्वीकृत नहीं है, तो संबंधित निर्माण कार्यों की वैधानिक स्थिति की जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस संबंध में एलडीए प्रवर्तन जोन-5 की जोनल अधिकारी वंदना पांडे का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार उन्हें फोन कॉल और संदेश के माध्यम से संपर्क किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
स्थानीय नागरिकों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों ने शासन और प्रशासन से पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर अनियमितता या नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
नागरिकों का यह भी कहना है कि राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप अवैध निर्माण और भूमि उपयोग संबंधी मामलों में निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उनका मानना है कि पारदर्शी कार्रवाई से न केवल वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी, बल्कि आम जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
फिलहाल मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं और लोगों की निगाहें प्रशासन एवं एलडीए की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।






