
जन एक्सप्रेस /पुरोला :- उत्तरकाशी की रवांई घाटी स्थित रामा सिराईं और कमल सिराईं पट्टियों में श्रावण मास के पारंपरिक मेलों की धूम देखने को मिल रही है। क्षेत्र के आराध्य देव शिकारू नाग महाराज की श्रावण जातर के अंतर्गत शुक्रवार को करड़ा गांव में विशाल मेले का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने आस्था और उत्साह के साथ भाग लिया।
जैसाण थोक के खलाड़ी गांव से पिछले सप्ताह शुरू हुई शिकारू नाग महाराज की श्रावण जातर गुरुवार को मैराणा गांव से करड़ा पहुंची। देवडोली के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने पारंपरिक ढोल-दमाऊ और नगाड़ों की गूंज के बीच भव्य स्वागत किया। देवडोली के साथ क्षेत्र के स्याणों, पुजारियों, वजीरों और ग्रामीणों ने पारंपरिक देव पूजन किया तथा तांदी और रासों जैसे लोकनृत्यों और लोकगीतों के माध्यम से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
शुक्रवार को पूरे दिन मेले का उल्लासपूर्ण वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की और स्थानीय संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों का आनंद लिया। मेले के समापन पर देवडोली को श्रद्धापूर्वक शिकारू गांव के लिए विदा किया गया।
क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार हर वर्ष श्रावण मास में शिकारू नाग महाराज के मेले कमल सिराईं क्षेत्र के खलाड़ी, आराकोट, चपटाड़ी, पुजेली, नेत्री, करड़ा, शिकारू, दणमाना, मैराणा और रतेड़ी सहित कई गांवों में आयोजित किए जाते हैं। इन मेलों में पारंपरिक व्यंजन, लोकगीत, तांदी नृत्य और धार्मिक अनुष्ठान स्थानीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को जीवंत बनाए रखते हैं।
रवांई घाटी में धान की रोपाई और निराई का कार्य पूरा होने के बाद पूर्णिमा से देव डोलियां अपने देवस्थानों से गांव-गांव भ्रमण के लिए निकलती हैं। इसी के साथ श्रावण मेलों का शुभारंभ होता है, जो क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।
मेले के दौरान देव माली मोहन प्रसाद, पुजारी श्यालिक राम नौटियाल, अध्यक्ष जवाहर सिंह रावत, रामकृष्ण, प्रधान कुलवंती, स्याणा जगमोहन रावत, बुद्धि सिंह भंडारी, जब्बर सिंह, शांति राम रतूड़ी, विनोद रतूड़ी, धीरपाल रावत, मनोज रतूड़ी, नेपाल सिंह रावत, अर्जुन सिंह, अमीन सिंह, जयेंद्र सिंह, रणदास, गंगा राम, सरदार सिंह, चैन सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं, युवा और बच्चे मौजूद रहे।






