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50 साल बाद खुला जमीनों के पुराने रिकॉर्ड का राज! 1983 के बंदोबस्त को लेकर त्यूनी तहसील पहुंचे दर्जनों किसान

जन एक्सप्रेस /विकास नगर :- जौनसार-बावर क्षेत्र के गरीब एवं परेशान किसान सोमवार को अपनी जमीनों से संबंधित शिकायतों को लेकर त्यूनी तहसील परिसर पहुंचे। दर्जनों किसानों ने अपनी-अपनी लिखित शिकायतें एवं संबंधित राजस्व अभिलेख तहसील प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करते हुए अपनी पूर्वजों की भूमि की जांच कराने तथा यदि किसी भूमि का नामांतरण अथवा इंद्राज नियम-विरुद्ध पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की।
किसानों ने 1951-52 एवं 1983 के बंदोबस्त अभिलेखों, पुराने खाता नंबर, नए खाता नंबर तथा वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित भूमि की जांच की मांग उठाई।

पांच वर्षों से जन, जंगल और जमीन के मुद्दे पर संघर्ष
रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल पिछले लगभग पांच वर्षों से जन, जंगल और जमीन के मुद्दे को लेकर लगातार संघर्ष कर रही है। संगठन के अनुसार आज इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पड़ाव सामने आया, जब प्रभावित परिवारों ने अपनी-अपनी फाइलें तैयार कर पुराने राजस्व अभिलेखों के आधार पर शिकायतें प्रशासन के समक्ष रखीं।

संगठन का कहना है कि जौनसार-बावर के जनजातीय क्षेत्र में जनजातीय भूमि के बाहरी/गैर-जनजातीय व्यक्तियों के नाम अंतरण एवं इंद्राज से जुड़े गंभीर सवाल सामने आए हैं। किसानों का आरोप है कि कुछ मामलों में उनके पूर्वजों की भूमि के अभिलेखों में बाद में परिवर्तन हुआ और भूमि अन्य व्यक्तियों के नाम दर्ज कर दी गई, जिसकी जानकारी संबंधित परिवारों को वर्षों बाद मिली।
किसानों एवं संगठन की ओर से यह सवाल उठाया गया कि यदि वर्ष 1983 में भूमि के अभिलेखों में किसी प्रकार का नियम-विरुद्ध परिवर्तन या नामांतरण हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। किसानों ने संबंधित अधिकारियों एवं अभिलेखों की भी जांच कर जो भी तथ्य सामने आएं, उनके आधार पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की।

रूद्रसेना के अनुसार प्रारंभिक तौर पर निजी भूमि, बंजर भूमि तथा बिना नंबर वाली भूमि सहित लगभग 600 से 700 बीघा भूमि से संबंधित शिकायतें सामने आई हैं। संगठन ने मांग की है कि प्रत्येक मामले की 1951-52 एवं 1983 के बंदोबस्त अभिलेखों तथा वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड से विधिवत जांच की जाए।

यदि किसी भूमि का इंद्राज अथवा नामांतरण नियम-विरुद्ध पाया जाता है तो नियमानुसार उसे निरस्त कर वास्तविक हकदारों के अधिकारों की रक्षा की जाए।रूद्रसेना देवभूमि उत्तराखंड/हिमाचल के संस्थापक राकेश उत्तराखंडी ने कहा कि संगठन ने पिछले पांच वर्षों से लगातार इस विषय को उठाया है और प्रभावित परिवारों को अपने पुराने राजस्व अभिलेख तलाशने तथा अपनी शिकायतें प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया है।

उन्होंने बताया कि इस प्रकरण को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष भी विषय रखा गया है। इसके बाद जिलाधिकारी देहरादून डॉ. आशीष चौहान से भी मुलाकात कर प्रकरण की जानकारी दी गई।
गोपाल सिंह पुत्र ज्ञान सिंह, भगत सिंह पुत्र खड़कू दौलत राम पुत्र चांदराम,तुलाराम,शिवदत्त,भगत सिंह,सीताराम,जय मोहन शर्मा,बालक राम,ज्ञानचंद्र,धर्म सिंह, आदि मौजूद रहे।

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