आर्मी/एमईएस में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का खुलासा, दो गिरफ्तार
फर्जी नियुक्ति पत्र, MES की मोहर-स्टांप, मेडिकल प्रमाण पत्र और मोबाइल फोन बरामद; कई लोगों से ठगी की आशंका

जन एक्सप्रेस : आर्मी के मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विसेज (एमईएस) में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने के आरोप में बनबसा पुलिस और एसओजी चम्पावत की संयुक्त टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से फर्जी नियुक्ति पत्र, एमईएस की फर्जी मोहर-स्टांप, स्टांप पैड, कूटरचित दस्तावेज, मेडिकल प्रमाण पत्र, मोबाइल फोन और घटना में प्रयुक्त स्कूटी बरामद की गई है।
पुलिस के मुताबिक, 28 सितंबर को मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिली सूचना के आधार पर बनबसा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि धीरज सक्सेना और उसके सहयोगी गणेश बहादुर ने एमईएस में नौकरी दिलाने के नाम पर उससे पांच हजार रुपये नकद और एक लाख 40 हजार रुपये यूपीआई के माध्यम से लिए। इसके बाद उसे फर्जी नियुक्ति पत्र देकर बायोमेट्रिक के नाम पर आर्मी क्षेत्र बनबसा के पास बुलाया गया। मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक चम्पावत रेखा यादव के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी टनकपुर निहारिका सेमवाल के पर्यवेक्षण में थाना बनबसा और एसओजी की संयुक्त टीम गठित की गई। पुलिस टीम ने देर रात दोनों आरोपियों को रेलवे अंडरपास, सैलानीगोठ रोड बनबसा से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, आरोपी धीरज सक्सेना के पास से फर्जी नियुक्ति पत्र, एमईएस की मोहर-स्टांप, स्टांप पैड, कूटरचित दस्तावेज, फोटो और मोबाइल फोन बरामद हुआ। वहीं गणेश बहादुर के पास से नियुक्ति पत्रों से संबंधित फाइलें, मेडिकल प्रमाण पत्र, फर्जी स्टांप-मोहर और मोबाइल फोन बरामद किए गए। पुलिस ने घटना में प्रयुक्त टीवीएस वीगो यूके07-एसी-3133 स्कूटी भी बरामद की है।
प्रारंभिक जांच में पुलिस को आरोपियों द्वारा अन्य लोगों को भी आर्मी/एमईएस में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी किए जाने की जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक, धीरज सक्सेना के मोबाइल फोन में लाखों रुपये के लेन-देन से संबंधित जानकारी भी मिली है। पुलिस अब अन्य संभावित पीड़ितों और लेन-देन की जानकारी जुटा रही है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धीरज सक्सेना पुत्र सुभाष चंद्र सक्सेना निवासी ग्राम भजनपुर, बनबसा और गणेश बहादुर पुत्र लाल बहादुर निवासी ग्वाल गांव, धारचूला, पिथौरागढ़ के रूप में हुई है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर किसी को भी रकम देने से पहले संबंधित विभाग और नियुक्ति की आधिकारिक जानकारी जरूर सत्यापित करें। फर्जी नियुक्ति पत्र, मोहर या दस्तावेजों के झांसे में न आएं और संदिग्ध गतिविधि की सूचना पुलिस को दें।






