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फर्जी प्रमाणपत्र मामले में बागेश्वर के 10 शिक्षकों की सेवा समाप्त

शैक्षिक प्रमाणपत्र, टीईटी और स्थायी निवास प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया जारी

जन एक्सप्रेस /बागेश्वर :-  उत्तराखंड में सरकारी शिक्षक की नौकरी के लिए कथित फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में शिक्षा विभाग की जांच जारी है। विभिन्न जिलों से मिली शिकायतों के आधार पर शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों के साथ ही टीईटी और स्थायी निवास प्रमाणपत्रों का भी सत्यापन कराया जा रहा है।बागेश्वर जिले में दस्तावेजों की जांच के दौरान 10 शिक्षकों के प्रमाणपत्र फर्जी और कूटरचित पाए जाने की विभागीय जानकारी सामने आई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर इन सभी शिक्षकों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं।प्रभारी डीईओ बेसिक बागेश्वर आशाराम के अनुसार, विभागीय सत्यापन प्रक्रिया के दौरान दस शिक्षकों के दस्तावेज रामनगर बोर्ड की जांच में फर्जी और कूटरचित पाए गए। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित शिक्षकों की सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की गई।

इनमें छह शिक्षक कपकोट तथा दो-दो शिक्षक कांडा और बागेश्वर क्षेत्र से संबंधित बताए गए हैं। कार्रवाई की जद में कमला देवी, चंद्र प्रकाश, रजनी, लक्ष्मी आर्य, रोहित कुमार, नेहा, संजय कुमार, अरविंद कुमार, पंकज कुमार और प्रियंका के नाम शामिल हैं।प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कुंवर सिंह रावत के मुताबिक विभिन्न जिलों से मिली शिकायतों के आधार पर संदिग्ध शिक्षकों को चिन्हित कर उनके प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जा रहा है। जांच में शैक्षिक प्रमाणपत्रों के अलावा टीईटी और स्थायी निवास प्रमाणपत्रों को भी शामिल किया जा रहा है।

नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

फर्जी दस्तावेज पाए जाने के बाद अब यह सवाल भी सामने आ रहा है कि संबंधित प्रमाणपत्र नियुक्ति से पहले सरकारी सत्यापन प्रक्रिया में कैसे पास हुए। विभागीय स्तर पर नियुक्ति और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया की भी पड़ताल किए जाने की बात कही जा रही है।प्रारंभिक शिक्षा निदेशक के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति से संबंधित प्रक्रियाएं जिला स्तर पर पूरी होती हैं और ऐसे मामलों में सेवा समाप्ति के आदेश भी जिला स्तर से जारी किए जा रहे हैं।फिलहाल विभाग का मुख्य फोकस प्रमाणपत्रों के सत्यापन और दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई पर है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि संदिग्ध प्रमाणपत्रों के सत्यापन और नियुक्ति की प्रक्रिया में कहीं कोई अनियमितता हुई थी या नहीं।

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