धनतेरस पर क्या खरीदें और क्या नहीं? जानिए खरीदारी का शुभ मुहूर्त, शुभ वस्तुएं और जरूरी मान्यताएं

लखनऊ। धनतेरस का त्योहार आज 6 नवंबर को पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। दीपावली से पहले आने वाले इस पर्व पर बाजारों में रौनक है। सोना-चांदी, बर्तन, वाहन और घरेलू सामान की खरीदारी के लिए लोग तैयारियों में जुटे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर नई वस्तुएं खरीदना सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। लेकिन इस दिन खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त और कुछ पारंपरिक मान्यताओं का भी विशेष महत्व है।
धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर खरीदारी के लिए इस बार दो शुभ समय बताए गए हैं। लखनऊ में पहला शुभ मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 31 मिनट से शाम 4 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। वहीं दूसरा शुभ समय शाम 5 बजकर 45 मिनट से 7 बजकर 42 मिनट तक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन समयों में सोना-चांदी, बर्तन और अन्य नई वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है।
धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?
धनतेरस के दिन सोना और चांदी खरीदने की परंपरा काफी पुरानी है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई कीमती धातुएं घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक होती हैं। हालांकि, सोना-चांदी खरीदना जरूरी नहीं है। कम बजट में भी कई ऐसी चीजें खरीदी जा सकती हैं, जिन्हें इस पर्व पर शुभ माना जाता है।
- पीतल और तांबे के बर्तन: धार्मिक मान्यताओं में इन धातुओं को शुभ माना जाता है।
- झाड़ू: इसे घर की दरिद्रता दूर करने और स्वच्छता व खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
- धनिया के बीज: इन्हें धन और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
- मिट्टी के दीपक: दीपावली की रोशनी और सकारात्मकता का प्रतीक माने जाते हैं।
- सोना-चांदी: संपन्नता और समृद्धि के प्रतीक के रूप में इनकी खरीदारी की जाती है।
धनतेरस पर किन चीजों की खरीदारी से बचें?
पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस पर लोहे, कांच और धारदार वस्तुओं की खरीदारी से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ये धार्मिक और पारंपरिक मान्यताएं हैं, कोई वैज्ञानिक नियम नहीं। खरीदारी करते समय अपनी जरूरत और बजट को प्राथमिकता देना जरूरी है।
धनतेरस पर क्यों होती है भगवान धन्वंतरि की पूजा?
धनतेरस को धन, आरोग्य और समृद्धि का पर्व माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को आयुर्वेद और स्वास्थ्य का देवता माना जाता है। इसीलिए धनतेरस पर उनकी पूजा कर अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की जाती है। इसके साथ ही माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की आराधना भी की जाती है।
यम दीपदान का भी है विशेष महत्व
धनतेरस के दिन यम दीपदान की भी परंपरा है। मान्यता के अनुसार शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाया जाता है। इसे यमराज की पूजा और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक विश्वास है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
अपनी सामर्थ्य के अनुसार करें खरीदारी
धनतेरस पर खरीदारी का मतलब केवल सोना-चांदी या महंगी वस्तुएं खरीदना नहीं है। अपनी आर्थिक स्थिति और जरूरत के अनुसार छोटी-सी खरीदारी करके भी इस पर्व को खास बनाया जा सकता है। आखिरकार असली धन केवल तिजोरी में रखी संपत्ति नहीं, बल्कि अच्छा स्वास्थ्य, परिवार की खुशियां और घर का सुख-चैन भी है।






